📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sivahari
राजनीति
समस्तीपुर में एसआईआर विरोध में बीसीपीआई (माले) का मार्च, मोदी‑शाह व चुनाव आयुक्त के पुतले फोड़े
✍️ Amar Ujala · Darbhanga
🗓 06 अक्टू. 2026, 05:16 PM
👁 22
समस्तीपुर के ताजपुर में बीसीपीआई (माले) ने एसआईआर विरोध में मार्च किया, पात्र मतदाताओं को सूची में दोबारा जोड़ने की मांग की और प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के पुतले फोड़े।
बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर में बीसीपीआई (माले) द्वारा एसआईआर (State Implementation Review) योजना के विरोध में प्रतिरोध मार्च आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर लेकर, सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए इलाके में मार्च किया।
प्रदर्शकों ने यह भी माँग की कि उन पात्र मतदाताओं के नाम जिन्हें मतदाता सूची से हटाया गया है, उन्हें पुनः जोड़ा जाए, और चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएँ।
मार्च के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले फोड़े गए, जिसे प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के प्रति अपनी असंतुष्टि का प्रतीक बताया।
स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शन पर नज़र रखी, लेकिन कोई बड़ी टकराव की सूचना नहीं मिली। यह मार्च बिहार में केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव को दर्शाता है, जिन्हें विरोधी दलों ने कुछ वर्गों को बाहर करने वाला कहा है।
बीसीपीआई (माले) ने दोहराते हुए कहा कि चुनावी सुधार में सभी पात्र नागरिकों को सही रूप से मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए, अन्यथा लोकतांत्रिक वैधता को नुकसान पहुँच सकता है।
प्रदर्शकों ने यह भी माँग की कि उन पात्र मतदाताओं के नाम जिन्हें मतदाता सूची से हटाया गया है, उन्हें पुनः जोड़ा जाए, और चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएँ।
मार्च के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले फोड़े गए, जिसे प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के प्रति अपनी असंतुष्टि का प्रतीक बताया।
स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शन पर नज़र रखी, लेकिन कोई बड़ी टकराव की सूचना नहीं मिली। यह मार्च बिहार में केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव को दर्शाता है, जिन्हें विरोधी दलों ने कुछ वर्गों को बाहर करने वाला कहा है।
बीसीपीआई (माले) ने दोहराते हुए कहा कि चुनावी सुधार में सभी पात्र नागरिकों को सही रूप से मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए, अन्यथा लोकतांत्रिक वैधता को नुकसान पहुँच सकता है।