📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kamlesh.legalaid
अपराध
कोर्ट ने कहा: नेपालियों की राष्ट्रीयता के कारण पैरोल नहीं रोका जा सकता
✍️ Live Law
🗓 15 सित. 2026, 04:32 PM
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एक भारतीय अदालत ने कहा कि केवल नेपालियों की राष्ट्रीयता के कारण पैरोल नहीं रोका जा सकता, जब परिवार भारत में रहता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीयता ही पैरोल से इनकार करने का एकमात्र मानदंड नहीं बन सकता। हालिया निर्णय में अदालत ने कहा कि एक कैदी की नेपाली नागरिकता, जब उसके निकटतम परिवार के सदस्य भारत में रहते हों, तो पैरोल से इनकार का आधार नहीं बनती। यह रुख पैरोल प्रक्रिया में मानवीय पहलुओं, जैसे पारिवारिक बंधन और आश्रितों के कल्याण को महत्व देता है।
विचाराधीन पैनल ने कहा कि पैरोल का उद्देश्य अपराधियों को समाज में पुनः स्थापित करना है, और नागरिकता के आधार पर मनमाना इनकार संविधान के समानता और भेदभाव-विरोधी सिद्धांतों के विरुद्ध है। अदालत ने निचली अदालतों और जेल प्राधिकरणों को प्रत्येक आवेदन को उसके वास्तविक गुणों—व्यवहार, स्वास्थ्य और भारत में सहायक परिवार नेटवर्क—के आधार पर मूल्यांकन करने का निर्देश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत में बंद विदेशी नागरिकों से जुड़े भविष्य के मामलों में एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे पैरोल को राष्ट्रीयता से जुड़ी दंडात्मक साधन के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा। यह फैसला सभी न्यायिक क्षेत्रों में पैरोल दिशानिर्देशों के समान अनुप्रयोग की भी मांग करता है।
विचाराधीन पैनल ने कहा कि पैरोल का उद्देश्य अपराधियों को समाज में पुनः स्थापित करना है, और नागरिकता के आधार पर मनमाना इनकार संविधान के समानता और भेदभाव-विरोधी सिद्धांतों के विरुद्ध है। अदालत ने निचली अदालतों और जेल प्राधिकरणों को प्रत्येक आवेदन को उसके वास्तविक गुणों—व्यवहार, स्वास्थ्य और भारत में सहायक परिवार नेटवर्क—के आधार पर मूल्यांकन करने का निर्देश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत में बंद विदेशी नागरिकों से जुड़े भविष्य के मामलों में एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे पैरोल को राष्ट्रीयता से जुड़ी दंडात्मक साधन के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा। यह फैसला सभी न्यायिक क्षेत्रों में पैरोल दिशानिर्देशों के समान अनुप्रयोग की भी मांग करता है।