📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hațeganu Marcel / Photo taken with personal photo
धर्म
कोस्टी गांववासी प्रदूषित नाला पर विरोध, गनेश विसर्जन बैरल में
✍️ The Times of India
🗓 20 सित. 2026, 07:01 AM
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कोस्टी गांव के लोगों ने नाले के प्रदूषण के खिलाफ विरोध किया और बैरल में गनेश विसर्जन किया, रिपोर्टों के अनुसार।
कोस्टी गांववासी स्थानीय नाले के प्रदूषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए, जिसे वे अपने स्वास्थ्य के लिए खतरा मानते हैं। इस विरोध में उन्होंने पारंपरिक गनेश विसर्जन को बड़े बैरल में किया, ताकि प्रदूषित जल में सीधे विसर्जन न हो।
गवाहों के अनुसार, गांव वालों ने नाले के किनारे बाधाएँ लगाकर पर्चे लगाए और जल निकासी की तुरंत सफाई की मांग की। स्थानीय अधिकारियों से कई बार समाधान की अपील करने के बाद भी संतोषजनक जवाब न मिलने पर ही इस अनोखी विधि को अपनाया गया।
बैरल में विसर्जन का संचालन गांव के बुजुर्गों ने किया, जिससे धार्मिक रीति‑रिवाज़ों का पालन होते हुए जल स्रोत को और अधिक प्रदूषित होने से बचाया गया। इस कदम ने आसपास के कई क्षेत्रों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने पर्यावरणीय जागरूकता और सांस्कृतिक आस्था के इस मिश्रण को सराहा।
कोई चोट या हिंसा नहीं हुई, और विसर्जन के बाद प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। जिला प्रशासन से नाले के प्रदूषण के स्रोत की जांच और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में जल गुणवत्ता के प्रति बढ़ती चिंता और स्वास्थ्य व धार्मिक मान्यताओं की रक्षा के लिए समुदायों द्वारा उठाए गए कदमों को उजागर करती है।
गवाहों के अनुसार, गांव वालों ने नाले के किनारे बाधाएँ लगाकर पर्चे लगाए और जल निकासी की तुरंत सफाई की मांग की। स्थानीय अधिकारियों से कई बार समाधान की अपील करने के बाद भी संतोषजनक जवाब न मिलने पर ही इस अनोखी विधि को अपनाया गया।
बैरल में विसर्जन का संचालन गांव के बुजुर्गों ने किया, जिससे धार्मिक रीति‑रिवाज़ों का पालन होते हुए जल स्रोत को और अधिक प्रदूषित होने से बचाया गया। इस कदम ने आसपास के कई क्षेत्रों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने पर्यावरणीय जागरूकता और सांस्कृतिक आस्था के इस मिश्रण को सराहा।
कोई चोट या हिंसा नहीं हुई, और विसर्जन के बाद प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। जिला प्रशासन से नाले के प्रदूषण के स्रोत की जांच और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में जल गुणवत्ता के प्रति बढ़ती चिंता और स्वास्थ्य व धार्मिक मान्यताओं की रक्षा के लिए समुदायों द्वारा उठाए गए कदमों को उजागर करती है।