📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Defence
राजनीति
कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मांगी मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव की बर्खास्तगी, विजय शाह मामले में कार्रवाई न मिलने पर
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 26 अग. 2026, 05:47 PM
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मध्यप्रदेश कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूरी कैबिनेट को बर्खास्त करने की मांग की है, क्योंकि केंद्रीय सरकार ने कर्नल सौफिया कुरैशी मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी। इस मुद्दे की सुनवाई 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होगी।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूरी कैबिनेट को बर्खास्त करने की मांग की है। यह मांग तब उठी है जब केंद्र सरकार ने कर्नल सौफिया कुरैशी मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी।
कर्नल सौफिया कुरैशी मामले में अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं, और इस जांच में राज्य के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह का नाम आया है। लेकिन गृह मंत्रालय ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी, जिससे कांग्रेस ने राज्य सरकार पर मंत्री को बचाने का आरोप लगाया है।
पटवारी के पत्र में राष्ट्रपति से राज्य सरकार को हटाने का अधिकार प्रयोग करने का अनुरोध किया गया है, यह तर्क देते हुए कि अभियोजन की मंजूरी न मिलने से कानून का सम्मान नहीं हो रहा है। इस मुद्दे की कानूनी जाँच के लिए 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच तनाव को बढ़ा सकता है और आगामी चुनावों से पहले राज्य की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
कर्नल सौफिया कुरैशी मामले में अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं, और इस जांच में राज्य के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह का नाम आया है। लेकिन गृह मंत्रालय ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी, जिससे कांग्रेस ने राज्य सरकार पर मंत्री को बचाने का आरोप लगाया है।
पटवारी के पत्र में राष्ट्रपति से राज्य सरकार को हटाने का अधिकार प्रयोग करने का अनुरोध किया गया है, यह तर्क देते हुए कि अभियोजन की मंजूरी न मिलने से कानून का सम्मान नहीं हो रहा है। इस मुद्दे की कानूनी जाँच के लिए 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच तनाव को बढ़ा सकता है और आगामी चुनावों से पहले राज्य की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।