📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Culture
राजनीति
कांग्रेस ने लखनऊ के रामलीला मैदान में रैली की, अखिलेश यादव उपस्थित, राहुल गांधी अनुपस्थित
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 02 नव. 2026, 09:15 AM
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रविवार को कांग्रेस ने लखनऊ के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की, जिससे विपक्षी राजनीति में अपनी स्थिति पुनः स्थापित करने की कोशिश की। वरिष्ठ नेता अखिलेश यादव ने हिस्सा लिया, जबकि राहुल गांधी अनुपस्थित रहे।
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित रामलीला मैदान में रविवार को “वोट बचाओ, देश बचाओ” शीर्षक से एक सार्वजनिक रैली आयोजित की। यह सभा आगामी चुनावी परिदृश्य में विपक्षी राजनीति में अपनी भूमिका पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस रैली में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि किसी औपचारिक समझौते के बिना भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मजबूरी मौजूद है। उनका उपस्थिति गठबंधन की बजाय रणनीतिक दबाव का संकेत माना गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं रहे, जिसे पार्टी के आंतरिक रणनीतिक निर्णयों के रूप में देखा गया। मंच से सरकार की नीतियों की आलोचना की गई और शासन सुधारों का वादा किया गया।
आयोजकों ने भीड़ की बड़ी संख्या की सूचना दी, हालांकि सटीक आंकड़े नहीं बताए गए। रैली का समापन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई के आह्वान और आगामी चुनावों में नई ऊर्जा के साथ लड़ने के संकल्प के साथ हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी आवाज़ को पुनः सुदृढ़ करने का एक रणनीतिक प्रयास है, जहाँ राष्ट्रीय राजनीति में राज्य का महत्व अत्यधिक है, जबकि गठबंधन की जटिलताओं को भी ध्यान में रखा गया है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस रैली में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि किसी औपचारिक समझौते के बिना भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मजबूरी मौजूद है। उनका उपस्थिति गठबंधन की बजाय रणनीतिक दबाव का संकेत माना गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं रहे, जिसे पार्टी के आंतरिक रणनीतिक निर्णयों के रूप में देखा गया। मंच से सरकार की नीतियों की आलोचना की गई और शासन सुधारों का वादा किया गया।
आयोजकों ने भीड़ की बड़ी संख्या की सूचना दी, हालांकि सटीक आंकड़े नहीं बताए गए। रैली का समापन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई के आह्वान और आगामी चुनावों में नई ऊर्जा के साथ लड़ने के संकल्प के साथ हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी आवाज़ को पुनः सुदृढ़ करने का एक रणनीतिक प्रयास है, जहाँ राष्ट्रीय राजनीति में राज्य का महत्व अत्यधिक है, जबकि गठबंधन की जटिलताओं को भी ध्यान में रखा गया है।