📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joint Suffrage Procession Committee(?), restored b
राजनीति
कांग्रेस ने चीन‑अधीन अरुणाचल प्रदेश दिखाने वाले यूएन मानचित्र का विरोध किया
✍️ ThePrint
🗓 11 सित. 2026, 04:03 AM
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संयुक्त राष्ट्र के मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा दिखाने पर औपचारिक विरोध दर्ज किया, इसे भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन कहा।
नई दिल्ली – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा दिखाने पर कड़ी निंदा की। पार्टी ने इस चित्रण को “अस्वीकार्य” कहा और इसे भारत की सीमाओं के उल्लंघन के रूप में दर्शाया।
कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि यह मानचित्र भारत सरकार की दीर्घकालिक स्थिति के विपरीत है, जो सिमला समझौते और अन्य द्विपक्षीय समझौतों के तहत अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है। उन्होंने यूएन से इस त्रुटि को सुधारने और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं की पुष्टि करने का आग्रह किया।
यह विरोध चीन द्वारा हाल ही में इस क्षेत्र पर अपने दावे को दोहराने के बाद आया है। जबकि भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, अधिकारियों से उम्मीद है कि वे आगामी बहुपक्षीय मंचों में इस मुद्दे को उठाएंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम मुख्यतः प्रतीकात्मक है, जो आगामी आम चुनाव से पहले घरेलू राजनीतिक कथा को सुदृढ़ करने के लिए किया गया है। फिर भी, यह विवादित सीमा के आसपास की तनावपूर्ण स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मंचों में सटीक मानचित्रण के महत्व को उजागर करता है।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक इस विशेष मानचित्र पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन वह सदस्य देशों के प्रस्तुतियों के आधार पर अपने भौगोलिक डेटा को नियमित रूप से अपडेट करता है। कांग्रेस की मांग यूएन पर दबाव बनाती है कि वह संप्रभु क्षेत्रों की सहमत परिभाषा को प्रतिबिंबित करे।
कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि यह मानचित्र भारत सरकार की दीर्घकालिक स्थिति के विपरीत है, जो सिमला समझौते और अन्य द्विपक्षीय समझौतों के तहत अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है। उन्होंने यूएन से इस त्रुटि को सुधारने और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं की पुष्टि करने का आग्रह किया।
यह विरोध चीन द्वारा हाल ही में इस क्षेत्र पर अपने दावे को दोहराने के बाद आया है। जबकि भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, अधिकारियों से उम्मीद है कि वे आगामी बहुपक्षीय मंचों में इस मुद्दे को उठाएंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम मुख्यतः प्रतीकात्मक है, जो आगामी आम चुनाव से पहले घरेलू राजनीतिक कथा को सुदृढ़ करने के लिए किया गया है। फिर भी, यह विवादित सीमा के आसपास की तनावपूर्ण स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मंचों में सटीक मानचित्रण के महत्व को उजागर करता है।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक इस विशेष मानचित्र पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन वह सदस्य देशों के प्रस्तुतियों के आधार पर अपने भौगोलिक डेटा को नियमित रूप से अपडेट करता है। कांग्रेस की मांग यूएन पर दबाव बनाती है कि वह संप्रभु क्षेत्रों की सहमत परिभाषा को प्रतिबिंबित करे।