📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Photo Division, Ministry of Information & Broadcas
अपराध
जमुई की नाबालिग पीड़िता की फोटो साझा करने पर सीएमओ क्लर्क पर एफआईआर, पटना में दर्ज
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 25 सित. 2026, 09:46 PM
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जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने के बाद सीएमओ के आशुलिपिक सागर प्रसाद सहित कई लोगों के खिलाफ पटना के सचिवालय थाना में एफआईआर दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय के आशुलिपिक सागर प्रसाद ने जमुई की नाबालिग पीड़िता तथा उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रकाशित की, जिससे तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं और बच्चे की गोपनीयता को खतरा उत्पन्न हुआ।
पटना के सचिवालय थाना में इस घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें क्लर्क और अन्य सहयोगियों को शामिल किया गया। शिकायत में बाल यौन शोषण (POCSO) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत नाबालिग की तस्वीर बिना अनुमति के प्रकाशित करने की आपराधिक जिम्मेदारी का हवाला दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि जांच में उन सभी व्यक्तियों की पहचान की जाएगी जिन्होंने इस सामग्री को प्रसारित करने में मदद की, और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एक वरिष्ठ पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी सामग्री का प्रसारण गंभीर अपराध है और भविष्य में इसी प्रकार के उल्लंघनों को रोकने के लिए शीघ्र दंड दिया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला डिजिटल गोपनीयता और नाबालिगों की सुरक्षा के नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है, और अनधिकृत तस्वीरों के शेयरिंग के मामलों में भविष्य में कड़ी सजा के उदाहरण स्थापित कर सकता है।
पटना के सचिवालय थाना में इस घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें क्लर्क और अन्य सहयोगियों को शामिल किया गया। शिकायत में बाल यौन शोषण (POCSO) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत नाबालिग की तस्वीर बिना अनुमति के प्रकाशित करने की आपराधिक जिम्मेदारी का हवाला दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि जांच में उन सभी व्यक्तियों की पहचान की जाएगी जिन्होंने इस सामग्री को प्रसारित करने में मदद की, और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एक वरिष्ठ पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी सामग्री का प्रसारण गंभीर अपराध है और भविष्य में इसी प्रकार के उल्लंघनों को रोकने के लिए शीघ्र दंड दिया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला डिजिटल गोपनीयता और नाबालिगों की सुरक्षा के नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है, और अनधिकृत तस्वीरों के शेयरिंग के मामलों में भविष्य में कड़ी सजा के उदाहरण स्थापित कर सकता है।