📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Govt. of India
अपराध
सीजेपी ने कहा दिल्ली पुलिस ने डिपके को चिंतित माता‑पिता से बात करने से रोका, वीडियो सबूत जारी
✍️ Sikkimexpress
🗓 12 अक्टू. 2026, 11:32 AM
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पंजाब के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने डिपके को चिंतित माता‑पिता से मिलने से रोका, जबकि पुलिस ने अब अपना समर्थन करने वाला वीडियो जारी किया।
पंजाब के मुख्य न्यायाधीश (CJP) ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने डिपके, जो हालिया जांच में शामिल एक नाबालिग है, को उसके चिंतित माता‑पिता से मिलने की अनुमति नहीं दी। CJP के अनुसार, माता‑पिता मामले की परिस्थितियों को समझने के लिए उत्सुक थे, पर पुलिस अधिकारियों ने सीधे संवाद को रोक दिया।
इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा कि सभी प्रक्रियात्मक नियमों का पालन किया गया और माता‑पिता को रोकना उनके अधिकारों में बाधा नहीं था। अपनी बात को सिद्ध करने के लिए पुलिस ने एक वीडियो क्लिप जारी किया, जिसे उन्होंने सबूत बताया है।
पुलिस के आधिकारिक चैनलों पर प्रकाशित इस वीडियो में अधिकारियों को माता‑पिता को कानूनी प्रक्रियाओं और नाबालिग के अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए दिखाया गया है। वीडियो में डिपके और उसके माता‑पिता के बीच सीधे संवाद नहीं दिखता, पर अधिकारियों का कहना है कि यह मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुपालन को दर्शाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद नाबालिग के अधिकारों की सुरक्षा और उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करता है। यदि CJP पुलिस के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई करने का निर्णय लेते हैं, तो इस मामले की आगे न्यायिक जांच हो सकती है।
जांच अभी जारी है और आगे की जानकारी के लिए अधिकारियों ने अभी तक कोई अतिरिक्त विवरण नहीं दिया है।
इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा कि सभी प्रक्रियात्मक नियमों का पालन किया गया और माता‑पिता को रोकना उनके अधिकारों में बाधा नहीं था। अपनी बात को सिद्ध करने के लिए पुलिस ने एक वीडियो क्लिप जारी किया, जिसे उन्होंने सबूत बताया है।
पुलिस के आधिकारिक चैनलों पर प्रकाशित इस वीडियो में अधिकारियों को माता‑पिता को कानूनी प्रक्रियाओं और नाबालिग के अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए दिखाया गया है। वीडियो में डिपके और उसके माता‑पिता के बीच सीधे संवाद नहीं दिखता, पर अधिकारियों का कहना है कि यह मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुपालन को दर्शाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद नाबालिग के अधिकारों की सुरक्षा और उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करता है। यदि CJP पुलिस के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई करने का निर्णय लेते हैं, तो इस मामले की आगे न्यायिक जांच हो सकती है।
जांच अभी जारी है और आगे की जानकारी के लिए अधिकारियों ने अभी तक कोई अतिरिक्त विवरण नहीं दिया है।