📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Imanushkasingh
स्थानीय
भोपाल में मास्टर प्लान के लिए नागरिकों का मार्च, विधायक अरिफ मसूद ने देरी पर सवाल उठाए
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 09 सित. 2026, 02:47 PM
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भोपाल के नागरिकों ने मास्टर प्लान लागू करने की मांग में दौड़ आयोजित की, जबकि विधायक अरिफ मसूद ने उज्जैन को योजना मिलने के बाद भोपाल की 20‑साल की देरी पर सवाल उठाए।
इस सप्ताह की शुरुआत में भोपाल के कई नागरिकों ने "मास्टर प्लान के लिए दौड़" का आयोजन किया और शहर की सड़कों पर सरकार से तत्काल शहरी योजना की माँग की। भागीदारों ने पर्चे और नारे लगाए, यह जताते हुए कि बीते लगभग बीस वर्षों से भोपाल के पास कोई व्यापक मास्टर प्लान नहीं है।
रैली के दौरान विधायक अरिफ मसूद ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पूछा कि उज्जैन को मास्टर प्लान मिल गया है तो भोपाल को दो दशकों से क्यों नहीं मिला। उन्होंने अधिकारियों से शीघ्र कार्यवाही की अपील की, यह कहा कि देरी से बुनियादी ढाँचा और शहरी विकास बाधित हो रहा है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को अब तक मास्टर प्लान न मिलने के कारण भूमि उपयोग, परिवहन और सार्वजनिक सेवाओं के नियोजन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उज्जैन को हाल ही में योजना मिलने के बाद इस अंतर ने नागरिकों की असंतुष्टि को और बढ़ा दिया है।
सरकारी पक्ष से अभी तक इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, पर यह प्रदर्शन शहर की शहरी रूपरेखा को प्राथमिकता देने की जनता की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
यह घटना भारतीय शहरों में नागरिक सक्रियता की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जहाँ लोग अपने शहरी नियोजन में पारदर्शिता और समयबद्धता की माँग कर रहे हैं।
रैली के दौरान विधायक अरिफ मसूद ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पूछा कि उज्जैन को मास्टर प्लान मिल गया है तो भोपाल को दो दशकों से क्यों नहीं मिला। उन्होंने अधिकारियों से शीघ्र कार्यवाही की अपील की, यह कहा कि देरी से बुनियादी ढाँचा और शहरी विकास बाधित हो रहा है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को अब तक मास्टर प्लान न मिलने के कारण भूमि उपयोग, परिवहन और सार्वजनिक सेवाओं के नियोजन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उज्जैन को हाल ही में योजना मिलने के बाद इस अंतर ने नागरिकों की असंतुष्टि को और बढ़ा दिया है।
सरकारी पक्ष से अभी तक इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, पर यह प्रदर्शन शहर की शहरी रूपरेखा को प्राथमिकता देने की जनता की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
यह घटना भारतीय शहरों में नागरिक सक्रियता की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जहाँ लोग अपने शहरी नियोजन में पारदर्शिता और समयबद्धता की माँग कर रहे हैं।