📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anupam Shrivastava
शिक्षा
शहडोल के गांव में बच्चों को स्कूल की छत साफ़ करने को कहा, बवाल, जांच का आदेश
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 04 सित. 2026, 03:02 PM
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बारिश में शहडोल के गोर्तरा गाँव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय की छत साफ़ करते बच्चों का वीडियो वायरल हुआ, जिससे सार्वजनिक गुस्सा और जांच का आदेश मिला।
शहडोल जिले के गोर्तरा गाँव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बारिश के दौरान बच्चों को स्कूल की छत साफ़ करने को कहा जाता दिखाने वाला एक छोटा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस क्लिप में छात्रवर्ग को गीले बरसात में छत के नीचे धूल‑मिट्टी साफ़ करते हुए दिखाया गया है।
वीडियो को देख कर ट्विटर और फेसबुक सहित कई प्लेटफ़ॉर्म पर व्यापक निंदा हुई। उपयोगकर्ताओं ने इसे बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही और अनुचित व्यवहार बताया। स्थानीय नागरिकों और शिक्षा कार्यकर्ताओं ने तुरंत कार्रवाई की मांग की, यह तर्क देते हुए कि यह घटना स्कूलों में बाल कल्याण मानकों की उपेक्षा को दर्शाती है।
शहडोल जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले की औपचारिक जांच शुरू करने का आदेश दिया। स्कूल प्रधानाचार्य और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को घटना की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा यह बताने को कहा गया कि किन प्रक्रियाओं के तहत बच्चों को इस कार्य में शामिल किया गया। जांच में राज्य के छात्र सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य के अधिकारियों ने जनता से अप्रमाणित सामग्री को साझा करने से बचने की अपील की है और कहा है कि जांच के दौरान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग आवश्यक है। इस घटना ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण स्कूलों की स्थितियों और छात्रों की सुरक्षा के उपायों पर फिर से चर्चा को जन्म दिया है।
शिक्षा विभाग ने कहा कि जांच के परिणामों की सूचना समुदाय को दी जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि स्कूलों में सुरक्षित सीखने का माहौल बना रहे।
वीडियो को देख कर ट्विटर और फेसबुक सहित कई प्लेटफ़ॉर्म पर व्यापक निंदा हुई। उपयोगकर्ताओं ने इसे बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही और अनुचित व्यवहार बताया। स्थानीय नागरिकों और शिक्षा कार्यकर्ताओं ने तुरंत कार्रवाई की मांग की, यह तर्क देते हुए कि यह घटना स्कूलों में बाल कल्याण मानकों की उपेक्षा को दर्शाती है।
शहडोल जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले की औपचारिक जांच शुरू करने का आदेश दिया। स्कूल प्रधानाचार्य और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को घटना की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा यह बताने को कहा गया कि किन प्रक्रियाओं के तहत बच्चों को इस कार्य में शामिल किया गया। जांच में राज्य के छात्र सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य के अधिकारियों ने जनता से अप्रमाणित सामग्री को साझा करने से बचने की अपील की है और कहा है कि जांच के दौरान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग आवश्यक है। इस घटना ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण स्कूलों की स्थितियों और छात्रों की सुरक्षा के उपायों पर फिर से चर्चा को जन्म दिया है।
शिक्षा विभाग ने कहा कि जांच के परिणामों की सूचना समुदाय को दी जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि स्कूलों में सुरक्षित सीखने का माहौल बना रहे।