📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति के तलाक के याचिका को सबूतों की कमी पर खारिज किया
✍️ The Times of India
🗓 26 सित. 2026, 03:01 AM
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति के तलाक के याचिका को खारिज कर दिया, यह कहा कि बिना ठोस सबूतों के आरोपों के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल ऐसे आरोपों पर भरोसा किया है जिनके लिए ठोस सबूत नहीं प्रस्तुत किए गए, इसलिए तलाक का आदेश देना कानूनी मानदंडों के अनुरूप नहीं है।
निर्णय में कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि भारतीय वैवाहिक कानून में तलाक के लिए क्रूरता, परित्याग या व्यभिचार जैसे कारणों के स्पष्ट और विश्वसनीय प्रमाण आवश्यक हैं। केवल दावे, चाहे कितने भी ईमानदार हों, इस evidentiary मानक को पूरा नहीं करते।
यह फैसला न्यायपालिका की सावधानी को दर्शाता है, जो बिना ठोस प्रमाण के वैवाहिक विवादों में हस्तक्षेप नहीं करती, और इस प्रकार दोनों पक्षों में से किसी भी द्वारा आगे वैध याचिका दायर न होने तक वैवाहिक बंधन बना रहता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य भर में समान मामलों के लिए एक मार्गदर्शक बन सकता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तलाक की प्रक्रिया को अटकलों के बजाय सत्यापित तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।
निर्णय में कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि भारतीय वैवाहिक कानून में तलाक के लिए क्रूरता, परित्याग या व्यभिचार जैसे कारणों के स्पष्ट और विश्वसनीय प्रमाण आवश्यक हैं। केवल दावे, चाहे कितने भी ईमानदार हों, इस evidentiary मानक को पूरा नहीं करते।
यह फैसला न्यायपालिका की सावधानी को दर्शाता है, जो बिना ठोस प्रमाण के वैवाहिक विवादों में हस्तक्षेप नहीं करती, और इस प्रकार दोनों पक्षों में से किसी भी द्वारा आगे वैध याचिका दायर न होने तक वैवाहिक बंधन बना रहता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य भर में समान मामलों के लिए एक मार्गदर्शक बन सकता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तलाक की प्रक्रिया को अटकलों के बजाय सत्यापित तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।