📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पत्नी के पति के रूप‑रंग पर टिप्पणी के कारण तलाक याचिका खारिज की
✍️ indiatoday.in
🗓 25 सित. 2026, 11:01 AM
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पत्नी द्वारा पति को काला और मोटा कहने के बाद दायर तलाक याचिका को खारिज कर दिया, यह कहा कि ऐसे बयान वैध तलाक के कारण नहीं बनते।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर ने उस तलाक याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पति ने अपनी पत्नी द्वारा खुद को "काला" और "मोटा" कहे जाने पर शिकायत की थी। यह याचिका पारिवारिक कानून के तहत दायर की गई थी, जिसमें भावनात्मक पीड़ा और अपमान का हवाला दिया गया था।
न्यायालय ने यह जांचा कि क्या पत्नी के इन बयानों से पति पर मानसिक क्रूरता या उत्पीड़न हुआ है जो तलाक का वैध कारण बन सके। कोर्ट ने कहा कि ये टिप्पणी आपत्तिजनक तो हैं, परन्तु हिंदू विवाह अधिनियम के तहत निर्धारित क्रूरता की सीमा को नहीं पार करतीं।
इसलिए अदालत ने दोनों पक्षों को वैवाहिक जीवन जारी रखने का आदेश दिया और पारस्परिक समस्याओं के समाधान हेतु काउंसलिंग लेने की सलाह दी। यह फैसला व्यक्तिगत अपमान को तलाक के कारण मानने में न्यायालय की सतर्कता को दर्शाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अदालतें तलाक देने से पहले लगातार मानसिक क्रूरता या दुरुपयोग के ठोस प्रमाण चाहती हैं, जबकि एकल मौखिक टिप्पणी को अक्सर पर्याप्त नहीं माना जाता।
यह मामला व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा और वैवाहिक विवादों में तलाक के दुरुपयोग के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है।
न्यायालय ने यह जांचा कि क्या पत्नी के इन बयानों से पति पर मानसिक क्रूरता या उत्पीड़न हुआ है जो तलाक का वैध कारण बन सके। कोर्ट ने कहा कि ये टिप्पणी आपत्तिजनक तो हैं, परन्तु हिंदू विवाह अधिनियम के तहत निर्धारित क्रूरता की सीमा को नहीं पार करतीं।
इसलिए अदालत ने दोनों पक्षों को वैवाहिक जीवन जारी रखने का आदेश दिया और पारस्परिक समस्याओं के समाधान हेतु काउंसलिंग लेने की सलाह दी। यह फैसला व्यक्तिगत अपमान को तलाक के कारण मानने में न्यायालय की सतर्कता को दर्शाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अदालतें तलाक देने से पहले लगातार मानसिक क्रूरता या दुरुपयोग के ठोस प्रमाण चाहती हैं, जबकि एकल मौखिक टिप्पणी को अक्सर पर्याप्त नहीं माना जाता।
यह मामला व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा और वैवाहिक विवादों में तलाक के दुरुपयोग के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है।