📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
देश
छत्तीसगढ़ HC ने गृहिणी की आर्थिक कठिनाइयों को देरी का कारण नहीं माना
✍️ Live Law
🗓 19 अग. 2026, 10:36 AM
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कहा कि गृहिणी की आर्थिक समस्याओं को कानूनी देरी को माफ़ करने का आधार नहीं माना जा सकता।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि गृहिणी की आर्थिक कठिनाइयाँ प्रक्रिया में देरी को माफ़ करने का वैध कारण नहीं बनतीं। न्यायालय ने कहा कि समय सीमा का पालन कानून के तहत अनिवार्य है, चाहे व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।
यह फैसला एक याचिका से उत्पन्न हुआ, जिसमें याचिकाकर्ता, एक गृहिणी, ने गंभीर आर्थिक दबाव के कारण आवश्यक दस्तावेज़ समय पर जमा न कर पाने का हवाला दिया था। न्यायालय ने संबंधित प्रावधानों की समीक्षा की और पाया कि केवल आर्थिक कठिनाई के आधार पर देरी को माफ़ करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
याचिका को खारिज करके न्यायालय ने यह सिद्ध किया कि न्यायसंगत राहत को प्रक्रिया की सख्ती के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। वकीलों को सलाह दी गई कि वे समय से पहले फाइलिंग की योजना बनाएं और यदि वास्तविक बाधाएँ उत्पन्न हों तो वैकल्पिक उपाय तलाशें।
यह निर्णय भविष्य में उन मामलों में मिसाल बन सकता है जहाँ पक्ष आर्थिक कठिनाइयों को प्रक्रिया में चूक का बचाव बनाने की कोशिश करते हैं, जिससे न्यायपालिका की समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलती है।
यह फैसला एक याचिका से उत्पन्न हुआ, जिसमें याचिकाकर्ता, एक गृहिणी, ने गंभीर आर्थिक दबाव के कारण आवश्यक दस्तावेज़ समय पर जमा न कर पाने का हवाला दिया था। न्यायालय ने संबंधित प्रावधानों की समीक्षा की और पाया कि केवल आर्थिक कठिनाई के आधार पर देरी को माफ़ करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
याचिका को खारिज करके न्यायालय ने यह सिद्ध किया कि न्यायसंगत राहत को प्रक्रिया की सख्ती के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। वकीलों को सलाह दी गई कि वे समय से पहले फाइलिंग की योजना बनाएं और यदि वास्तविक बाधाएँ उत्पन्न हों तो वैकल्पिक उपाय तलाशें।
यह निर्णय भविष्य में उन मामलों में मिसाल बन सकता है जहाँ पक्ष आर्थिक कठिनाइयों को प्रक्रिया में चूक का बचाव बनाने की कोशिश करते हैं, जिससे न्यायपालिका की समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलती है।