📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
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छत्तीसगढ़ को 5 साल में मिली 9,188.20 करोड़ रुपये DMF फंड, ईडी ने जांच शुरू
✍️ India CSR
🗓 07 सित. 2026, 01:18 AM
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छत्तीसगढ़ ने पिछले पाँच वर्षों में डीएमएफ से कुल 9,188.20 करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं, और ईडी ने इन फंडों के उपयोग की जांच शुरू कर दी है।
छत्तीसगढ़ ने 2019 से 2024 के बीच जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) से कुल 9,188.20 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जैसा कि राज्य सरकार ने जारी आंकड़ों में दिखाया है। DMF योजना, खनन राजस्व का एक हिस्सा स्थानीय विकास के लिए आवंटित करती है, विशेषकर खनिज‑समृद्ध जिलों में।
अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन फंडों के उपयोग की जांच के लिए मामला दर्ज किया है, क्योंकि यह संदेह है कि कई राशि नियोजित कल्याणकारी परियोजनाओं में नहीं लगाई गई। प्रारम्भिक पूछताछ में निधि वितरण प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिससे एजेंसी ने राज्य से विस्तृत वित्तीय दस्तावेज़ मांगे हैं।
राज्य के अधिकारियों ने कहा है कि सभी DMF प्राप्तियां वैधानिक नियमों के अनुसार दर्ज की गई हैं और वे ED के साथ पूरी सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी हिस्सेदारी को बुनियादी ढाँचा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी पहलों के लिए निर्धारित किया गया है।
यह जांच कई भारतीय राज्यों में DMF निधियों के पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठे सवालों को फिर से उजागर करती है। जांच के परिणाम भविष्य में खनन राजस्व के आवंटन और निगरानी पर नीति सुधारों को दिशा दे सकते हैं।
अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन फंडों के उपयोग की जांच के लिए मामला दर्ज किया है, क्योंकि यह संदेह है कि कई राशि नियोजित कल्याणकारी परियोजनाओं में नहीं लगाई गई। प्रारम्भिक पूछताछ में निधि वितरण प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिससे एजेंसी ने राज्य से विस्तृत वित्तीय दस्तावेज़ मांगे हैं।
राज्य के अधिकारियों ने कहा है कि सभी DMF प्राप्तियां वैधानिक नियमों के अनुसार दर्ज की गई हैं और वे ED के साथ पूरी सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी हिस्सेदारी को बुनियादी ढाँचा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी पहलों के लिए निर्धारित किया गया है।
यह जांच कई भारतीय राज्यों में DMF निधियों के पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठे सवालों को फिर से उजागर करती है। जांच के परिणाम भविष्य में खनन राजस्व के आवंटन और निगरानी पर नीति सुधारों को दिशा दे सकते हैं।