📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
यात्रा
चेन्नई में परंदुर हवाई अड्डा प्रोजेक्ट रद्द, दूसरा हवाई अड्डा चाहिए या नहीं
✍️ India Today
🗓 27 अग. 2026, 01:33 AM
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चेन्नई के पास परंदुर में दूसरे हवाई अड्डे की योजना को रद्द कर दिया गया, जिससे बढ़ती हवाई यातायात की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता पर सवाल उठे हैं।
राज्य सरकार ने चेन्नई से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण में स्थित परंदुर में द्वितीय वाणिज्यिक हवाई अड्डा बनाने की योजना को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा घोषित इस कदम को लागत‑बढ़ोतरी वाला माना गया, जिससे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के बजट पर दबाव पड़ सकता है।
परियोजना के समर्थकों का तर्क था कि चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षमता की सीमा के करीब पहुँच रहा है, जहाँ यात्रियों और माल की मात्रा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नया हवाई अड्डा भीड़भाड़ कम करेगा, अधिक एयरलाइन को आकर्षित करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
विपक्षियों ने उच्च भूमि अधिग्रहण लागत, पर्यावरणीय चिंताओं और मौजूदा हवाई अड्डे के संभावित अपग्रेड को विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। रद्दीकरण ने इस प्रश्न को फिर से उठाया है कि क्या चेन्नई को वास्तव में दूसरा हवाई अड्डा चाहिए या मौजूदा सुविधाओं को विस्तारित करके भविष्य की मांग को पूरा किया जा सकता है।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय तमिलनाडु की दीर्घकालिक हवाई योजना की पुनः समीक्षा की मांग करेगा, जबकि जनता दक्षिणी क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने वाले भविष्य के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के स्पष्ट दिशा‑निर्देशों की प्रतीक्षा कर रही है।
यह कदम दक्षिणी भारत में बढ़ती हवाई यात्रा की जरूरतों को कैसे संबोधित किया जाएगा, इस पर आगे की चर्चा को प्रेरित करेगा।
परियोजना के समर्थकों का तर्क था कि चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षमता की सीमा के करीब पहुँच रहा है, जहाँ यात्रियों और माल की मात्रा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नया हवाई अड्डा भीड़भाड़ कम करेगा, अधिक एयरलाइन को आकर्षित करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
विपक्षियों ने उच्च भूमि अधिग्रहण लागत, पर्यावरणीय चिंताओं और मौजूदा हवाई अड्डे के संभावित अपग्रेड को विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। रद्दीकरण ने इस प्रश्न को फिर से उठाया है कि क्या चेन्नई को वास्तव में दूसरा हवाई अड्डा चाहिए या मौजूदा सुविधाओं को विस्तारित करके भविष्य की मांग को पूरा किया जा सकता है।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय तमिलनाडु की दीर्घकालिक हवाई योजना की पुनः समीक्षा की मांग करेगा, जबकि जनता दक्षिणी क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने वाले भविष्य के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के स्पष्ट दिशा‑निर्देशों की प्रतीक्षा कर रही है।
यह कदम दक्षिणी भारत में बढ़ती हवाई यात्रा की जरूरतों को कैसे संबोधित किया जाएगा, इस पर आगे की चर्चा को प्रेरित करेगा।