📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Post of India
बिज़नेस
CBRE रिपोर्ट बताती है, एआई ने अभी भारत के ऑफिस लीज़िंग पर असर नहीं डाला
✍️ Telangana Today
🗓 27 अग. 2026, 01:33 PM
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एक हालिया CBRE अध्ययन से पता चलता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने अभी तक भारत के ऑफिस लीज़िंग पर असर नहीं डाला है, जबकि विश्व स्तर पर इसका शोर है। इस रिपोर्ट में पारंपरिक कारकों को प्रमुख बताया गया है।
वाणिज्यिक रियल एस्टेट परामर्श कंपनी CBRE ने एक तिमाही रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि अभी तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के ऑफिस लीज़िंग निर्णयों में निर्णायक कारक नहीं बन पाई है। जबकि अन्य क्षेत्रों में एआई उपकरण अपनाए जा रहे हैं, रिपोर्ट में कहा गया कि मकान मालिक और किरायेदार अभी भी स्थान, लागत और बुनियादी ढाँचे को तकनीकी‑आधारित विश्लेषण से अधिक महत्व देते हैं।
मुख्य भारतीय महानगरों से एकत्रित डेटा दर्शाता है कि खालीपन की दर और किराया वृद्धि पिछले तिमाहियों के समान बनी हुई है, और एआई‑सक्षम स्पेस प्लानिंग या भविष्यवाणी लीज़िंग मॉडल से कोई विशेष परिवर्तन नहीं दिखा। CBRE के विश्लेषकों का मानना है कि रियल एस्टेट कार्यप्रवाह में एआई का एकीकरण अभी प्रारम्भिक चरण में है और जागरूकता सीमित है।
रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि एआई की संभावनाओं को पहचाना गया है, परन्तु भारत के बाजार में लीज़िंग वार्ता, किरायेदार मिश्रण और स्पेस उपयोग पर इसका वास्तविक प्रभाव दिखने में समय लग सकता है। हितधारकों को तकनीकी विकास पर नजर रखनी चाहिए, परन्तु पारंपरिक बाजार मूलभूत तत्वों पर ध्यान देना जारी रखना चाहिए।
मुख्य भारतीय महानगरों से एकत्रित डेटा दर्शाता है कि खालीपन की दर और किराया वृद्धि पिछले तिमाहियों के समान बनी हुई है, और एआई‑सक्षम स्पेस प्लानिंग या भविष्यवाणी लीज़िंग मॉडल से कोई विशेष परिवर्तन नहीं दिखा। CBRE के विश्लेषकों का मानना है कि रियल एस्टेट कार्यप्रवाह में एआई का एकीकरण अभी प्रारम्भिक चरण में है और जागरूकता सीमित है।
रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि एआई की संभावनाओं को पहचाना गया है, परन्तु भारत के बाजार में लीज़िंग वार्ता, किरायेदार मिश्रण और स्पेस उपयोग पर इसका वास्तविक प्रभाव दिखने में समय लग सकता है। हितधारकों को तकनीकी विकास पर नजर रखनी चाहिए, परन्तु पारंपरिक बाजार मूलभूत तत्वों पर ध्यान देना जारी रखना चाहिए।