📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mike Blyth
स्वास्थ्य
मोतियाबिंद अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं, 40 पार वालों को भी हो रहा प्रभावित
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 30 जून 2026, 04:32 PM
👁 5
मोतियाबिंद, जो पहले मुख्य रूप से वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारी मानी जाती थी, अब 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में भी तेजी से पाई जा रही है, जो इसके शुरू होने की सामान्य आयु सीमा में बदलाव का संकेत देता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों ने 40 वर्ष की आयु पार कर चुके लोगों में मोतियाबिंद के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। यह अवलोकन इस पारंपरिक धारणा को चुनौती देता है कि मोतियाबिंद केवल बुजुर्गों को ही प्रभावित करता है।
यह उभरता हुआ रुझान बताता है कि मोतियाबिंद के विकास में योगदान देने वाले कारक पहले सोचे गए से युवा आयु वर्ग को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि उम्र हमेशा से एक प्रमुख जोखिम कारक रही है, इस बदलाव पर स्वास्थ्य पेशेवरों और जनता दोनों का ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
यह स्थिति, जिसमें आंख के लेंस का धुंधलापन शामिल है, अनुपचारित रहने पर दृष्टि धुंधली हो सकती है और अंततः दृष्टि हानि का कारण बन सकती है। प्रभावित व्यक्तियों की आयु सीमा का व्यापक होना सभी वयस्कों के लिए नियमित आंखों की जांच के महत्व को रेखांकित करता है, भले ही उनकी उम्र से जुड़े जोखिमों की धारणा कुछ भी हो।
यह उभरता हुआ रुझान बताता है कि मोतियाबिंद के विकास में योगदान देने वाले कारक पहले सोचे गए से युवा आयु वर्ग को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि उम्र हमेशा से एक प्रमुख जोखिम कारक रही है, इस बदलाव पर स्वास्थ्य पेशेवरों और जनता दोनों का ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
यह स्थिति, जिसमें आंख के लेंस का धुंधलापन शामिल है, अनुपचारित रहने पर दृष्टि धुंधली हो सकती है और अंततः दृष्टि हानि का कारण बन सकती है। प्रभावित व्यक्तियों की आयु सीमा का व्यापक होना सभी वयस्कों के लिए नियमित आंखों की जांच के महत्व को रेखांकित करता है, भले ही उनकी उम्र से जुड़े जोखिमों की धारणा कुछ भी हो।