📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TheSlumPanda
स्वास्थ्य
बीकानेर में पहला सेंटर: पीबीएम में शुरू होगी कार्टी‑सेल थेरेपी, चौथे चरण के कैंसर रोगियों को नई उम्मीद
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 14 सित. 2026, 11:31 AM
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उन्नत कैंसर के लिए लक्षित कार्टी‑सेल थेरेपी पीबीएम में शुरू होगी और बीकानेर में पहला केंद्र खुलने से चौथे चरण के रोगियों को नई उपचार संभावना मिलेगी।
प्रकाश भाटिया मेडिकल (पीबीएम) ने बताया कि वह टर्मिनल‑स्टेज कैंसर रोगियों के लिए कार्टी‑सेल थेरेपी शुरू करेगा। इस उपचार को बीकानेर, राजस्थान में पहला समर्पित केंद्र खोलकर लागू किया जाएगा।
कार्टी‑सेल थेरेपी में रोगी की अपनी टी‑सेल्स को निकालकर जीन‑संशोधित किया जाता है, जिससे वे कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें नष्ट कर सकें। यह विधि कई कठिन‑से‑उपचारित कैंसर में आशाजनक परिणाम दिखा चुकी है और अब चौथे चरण के रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, जहाँ पारंपरिक विकल्प सीमित होते हैं।
पीबीएम के अधिकारियों ने कहा कि बीकानेर में स्थापित केंद्र में आवश्यक प्रयोगशाला और क्लिनिकल सुविधाएँ होंगी, जिससे उपचार सुरक्षित रूप से दिया जा सकेगा। केंद्र अगले कुछ महीनों में चालू होने की संभावना है, जिससे उन रोगियों को अतिरिक्त उपचार विकल्प मिलेंगे जिन्होंने सामान्य उपचार समाप्त कर लिये हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस कदम को राजस्थान की ऑन्कोलॉजी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि इससे रोगियों को उन्नत उपचार के लिए बड़े शहरों की यात्रा कम करनी पड़ेगी। यह पहल राज्य में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक कदम है।
कार्टी‑सेल थेरेपी में रोगी की अपनी टी‑सेल्स को निकालकर जीन‑संशोधित किया जाता है, जिससे वे कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें नष्ट कर सकें। यह विधि कई कठिन‑से‑उपचारित कैंसर में आशाजनक परिणाम दिखा चुकी है और अब चौथे चरण के रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, जहाँ पारंपरिक विकल्प सीमित होते हैं।
पीबीएम के अधिकारियों ने कहा कि बीकानेर में स्थापित केंद्र में आवश्यक प्रयोगशाला और क्लिनिकल सुविधाएँ होंगी, जिससे उपचार सुरक्षित रूप से दिया जा सकेगा। केंद्र अगले कुछ महीनों में चालू होने की संभावना है, जिससे उन रोगियों को अतिरिक्त उपचार विकल्प मिलेंगे जिन्होंने सामान्य उपचार समाप्त कर लिये हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस कदम को राजस्थान की ऑन्कोलॉजी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि इससे रोगियों को उन्नत उपचार के लिए बड़े शहरों की यात्रा कम करनी पड़ेगी। यह पहल राज्य में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक कदम है।