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बढ़ई समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग, अखिल भारतीय बढ़ई महासभा ने उठाई आवाज
लखनऊ में अखिल भारतीय बढ़ई महासभा ने प्रेस वार्ता कर बढ़ई समाज के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों पर जोर दिया। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्राम शर्मा ने राजनीतिक दलों से समाज को उचित भागीदारी देने की मांग की।
लखनऊ, 10 अक्टूबर 2026: हजरतगंज स्थित प्रेस क्लब, लखनऊ में अखिल भारतीय बढ़ई महासभा द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता में बढ़ई समाज के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाया गया। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा ने राजनीतिक दलों से सीधा सवाल करते हुए कहा कि हिंदू एकता, ओबीसी अधिकारों और विश्वकर्मा समाज की एकता की बात तो होती है, लेकिन जब राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सत्ता में भागीदारी की बात आती है, तो बढ़ई समाज को उसका उचित स्थान क्यों नहीं मिलता?
श्री शर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा एक व्यापक सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान है, जिसमें बढ़ई, लोहार, स्वर्णकार, मूर्तिकार और अन्य शिल्पकार समुदाय शामिल हैं। इन सभी समुदायों को सम्मान एवं अवसर मिलना चाहिए, और किसी एक समुदाय की भागीदारी दूसरे समुदाय की उपेक्षा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बढ़ई समाज को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि नेतृत्व का अवसर चाहिए। इसके साथ ही, छोटे कारीगरों के लिए सस्ता ऋण, आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण और बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई। समाज के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने पर भी बल दिया गया।
महासभा ने लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद एवं स्थानीय निकायों में बढ़ई समाज को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की। साथ ही, मेहनतकश कारीगरों के श्रम का सम्मान हो तथा मजदूरी के भुगतान और उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया कि महासभा किसी समाज के विरोधी नहीं है, बल्कि चाहती है कि सभी समुदाय आगे बढ़ें, सभी को सम्मान मिले और सभी को उचित भागीदारी मिले। उन्होंने कहा कि बढ़ई समाज की उपेक्षा करके सामाजिक एकता का सपना पूरा नहीं हो सकता।
श्री शर्मा ने कहा कि अब समय है शिक्षा, संगठन, स्वाभिमान और राजनीतिक भागीदारी का। अखिल भारतीय बढ़ई महासभा समाज के अधिकारों, सम्मान और विकास की आवाज को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से निरंतर उठाती रहेगी। उन्होंने समाज से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्वान किया।
श्री शर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा एक व्यापक सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान है, जिसमें बढ़ई, लोहार, स्वर्णकार, मूर्तिकार और अन्य शिल्पकार समुदाय शामिल हैं। इन सभी समुदायों को सम्मान एवं अवसर मिलना चाहिए, और किसी एक समुदाय की भागीदारी दूसरे समुदाय की उपेक्षा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बढ़ई समाज को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि नेतृत्व का अवसर चाहिए। इसके साथ ही, छोटे कारीगरों के लिए सस्ता ऋण, आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण और बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई। समाज के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने पर भी बल दिया गया।
महासभा ने लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद एवं स्थानीय निकायों में बढ़ई समाज को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की। साथ ही, मेहनतकश कारीगरों के श्रम का सम्मान हो तथा मजदूरी के भुगतान और उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया कि महासभा किसी समाज के विरोधी नहीं है, बल्कि चाहती है कि सभी समुदाय आगे बढ़ें, सभी को सम्मान मिले और सभी को उचित भागीदारी मिले। उन्होंने कहा कि बढ़ई समाज की उपेक्षा करके सामाजिक एकता का सपना पूरा नहीं हो सकता।
श्री शर्मा ने कहा कि अब समय है शिक्षा, संगठन, स्वाभिमान और राजनीतिक भागीदारी का। अखिल भारतीय बढ़ई महासभा समाज के अधिकारों, सम्मान और विकास की आवाज को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से निरंतर उठाती रहेगी। उन्होंने समाज से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्वान किया।