स्थानीय
बाढ़ का पानी उतरते ही महामारी से बचाव की कवायद: पालीगंज के प्रभावित गांवों में चापाकलों में डाली जा रही क्लोरीन टैबलेट
यहाँ देखें:
▶️ YouTube
पुनपुन नदी के उफान से मची तबाही के बाद स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद, शुद्ध पेयजल की बहाली और जलजनित बीमारियों को रोकने के लिए प्रशासन का विशेष अभियान
पटना जिले के पालीगंज अनुमंडल में पुनपुन नदी के उफान से आई बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है। बाढ़ का पानी निकलने के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलजनित बीमारियों और महामारी को फैलने से रोकना है। इसी कड़ी में, अनुमंडल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में पीने के पानी को सुरक्षित बनाने के लिए युद्धस्तर पर चापाकलों (हैंडपंपों) के शुद्धीकरण और ब्लीचिंग पाउडर व क्लोरीन टैबलेट डालने का काम शुरू कर दिया गया है।
विगत दिनों पुनपुन नदी के खतरे के निशान पार करने से पालीगंज और दुल्हिनबाजार प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। बाढ़ के कारण अधिकांश चापाकल पूरी तरह से डूब गए थे, जिससे भूजल और पेयजल दूषित हो गया था। अब जब पानी खेतों और रिहायशी इलाकों से निकल रहा है, तो डायरिया, पीलिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को दूषित पानी के सेवन से बचाने के लिए प्रशासन हर एक सरकारी और निजी चापाकल को सैनिटाइज करने में जुटा है।
राहत एवं बचाव दल के सदस्यों और स्वास्थ्य कर्मियों की टोलियां प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर चापाकलों के अंदर क्लोरीन टैबलेट डाल रही हैं। ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि क्लोरीन टैबलेट डालने के कुछ समय बाद तक पानी का सीधे उपयोग न करें और पानी को हमेशा उबालकर या छानकर ही पिएं।
पालीगंज SDM चंदन कुमार ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यह शुद्धीकरण अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि किसी भी प्रकार की महामारी की स्थिति उत्पन्न न हो सके।
विगत दिनों पुनपुन नदी के खतरे के निशान पार करने से पालीगंज और दुल्हिनबाजार प्रखंड के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। बाढ़ के कारण अधिकांश चापाकल पूरी तरह से डूब गए थे, जिससे भूजल और पेयजल दूषित हो गया था। अब जब पानी खेतों और रिहायशी इलाकों से निकल रहा है, तो डायरिया, पीलिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को दूषित पानी के सेवन से बचाने के लिए प्रशासन हर एक सरकारी और निजी चापाकल को सैनिटाइज करने में जुटा है।
राहत एवं बचाव दल के सदस्यों और स्वास्थ्य कर्मियों की टोलियां प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर चापाकलों के अंदर क्लोरीन टैबलेट डाल रही हैं। ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि क्लोरीन टैबलेट डालने के कुछ समय बाद तक पानी का सीधे उपयोग न करें और पानी को हमेशा उबालकर या छानकर ही पिएं।
पालीगंज SDM चंदन कुमार ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यह शुद्धीकरण अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि किसी भी प्रकार की महामारी की स्थिति उत्पन्न न हो सके।