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18 सित. 2026
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बुंदेली में गूंजेगा श्याम नाम, 80 किलो फूलों से सजेगा बाबा का भव्य दरबार,होगा अलौकिक श्रृंगार, 56 भोग और भजन संध्या में उमड़ेंगे श्रद्धालु

✍️ रिपोर्टर: Vishwanath Pratap Singh 🗓 18 सित. 2026, 04:10 PM 👁 17
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कभी महज 50 श्रद्धालुओं से शुरू हुआ एक छोटा-सा धार्मिक आयोजन आज 12वें वर्ष में हजारों श्याम भक्तों की प्रतीक्षा का केंद्र बन चुका है। यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे वर्षों की निरंतरता, सेवा, समर्पण और उस विश्वास की ताकत है, जो हर वर्ष लोगों को बुंदेली की ओर खींच लाती है। शनिवार को जब यहां बाबा श्याम का दरबार सजेगा, तो यह केवल एक और धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि 11 वर्षों में आकार ले चुकी एक परंपरा का विराट रूप दिखाई देगा।
40 फीट ऊंचे पंडाल में 80 किलो फूलों से सजा बाबा श्याम का दरबार, 56 भोग, चुनरी उत्सव, पावन ज्योत और भजन गायकों की प्रस्तुतियां आयोजन की भव्यता को जरूर बढ़ाएंगी, लेकिन इसकी असली ताकत मंच और सजावट से कहीं आगे है। वह है लोगों का जुड़ाव।
धार्मिक आयोजनों की सफलता केवल भीड़ से नहीं मापी जानी चाहिए। सवाल यह है कि आयोजन समाज को कितना जोड़ता है और सेवा की भावना को कितना मजबूत करता है। बुंदेली का श्याम अखाड़ा इस मायने में अलग दिखाई देता है। नि:शुल्क श्याम रसोई और महाप्रसाद की व्यवस्था यह संदेश देती है कि भक्ति केवल दर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा से भी जुड़ी है।
इस आयोजन का विस्तार अब एक और बड़ी धार्मिक पहचान की ओर बढ़ रहा है। श्री बालाजी सेवा संघ के माध्यम से सालासर बालाजी के भव्य मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। छत और गुंबद का काम पूरा हो चुका है। यानी बुंदेली में बन रहा यह परिसर आने वाले समय में धार्मिक गतिविधियों का एक और महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
इस यात्रा में चार वर्ष पहले कन्हैया मित्तल की प्रस्तुति भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही। आज शीतल पाण्डे, संजीव शर्मा और प्रीति सरगम जैसे भजन कलाकारों की प्रस्तुतियों के लिए हजारों लोगों का जुटना बताता है कि बुंदेली का नाम अब स्थानीय सीमा से आगे श्याम भक्ति के मानचित्र पर अपनी जगह बना चुका है।
आस्था की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि उसे किसी निमंत्रण की जरूरत नहीं पड़ती विश्वास हो तो लोग स्वयं रास्ता तलाश लेते हैं। बुंदेली का श्याम अखाड़ा इसी विश्वास की 12 साल लंबी कहानी कह रहा है।

शनिवार की शाम जब 80 किलो फूलों की खुशबू के बीच बाबा श्याम की ज्योत प्रज्वलित होगी और हजारों कंठों से ‘हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा’ का जयघोष उठेगा, तब बुंदेली में केवल एक दरबार नहीं सजेगा एक दशक से अधिक समय में लोगों के दिलों में बनी आस्था की वह परंपरा फिर जीवंत होगी, जिसने छोटे से आयोजन को बड़े धार्मिक उत्सव में बदल दिया।

आयोजन समिति श्री श्याम अखाड़ा परिवार बुंदेली ने धर्मप्रेमी नागरिकों से परिवार एवं इष्ट-मित्रों सहित शाम 6:15 बजे पहुंचकर बाबा श्याम की पावन ज्योत के दर्शन करने और आयोजन में शामिल होने की अपील की है।
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