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🔴 Breaking news, : नेमावर में विश्वकर्मा समाज ने सामाजिक भूमि व मंदिर विवाद के समाधान हेतु प्रशासन से जाँच व समिति गठन की माँग
मालवी विश्वकर्मा लोहार समाज ने नेमावर/देवास में 25 वर्ष पुरानी भूमि व भगवान विश्वकर्मा मंदिर के विवाद का समाधान चाहते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जाँच, आम बैठक और नई समिति गठन का अनुरोध किया।
मालवी विश्वकर्मा लोहार समाज ने नेमावर/देवास में लगभग 25 वर्ष पुरानी सामाजिक भूमि व भगवान विश्वकर्मा मंदिर के विवाद का समाधान चाहते हुए अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस तथा खातेगांव के समक्ष संयुक्त सामाजिक ज्ञापन प्रस्तुत किया। ज्ञापन में समाजजनों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जाँच, सभी संबंधित पक्षों के बीच संवाद और समाजहित में उचित पहल करने का अनुरोध किया।
ज्ञापन के अनुसार, भूमि 25 वर्ष पूर्व धार्मिक एवं सामाजिक उद्देश्यों के लिए खरीदी गई थी और रजिस्ट्री पाँच व्यक्तियों के नाम पर कराई गई थी। समाजजनों का कहना है कि भूमि क्रय एवं धार्मिक‑सामाजिक कार्यों के लिए सामूहिक आर्थिक सहयोग भी जुटाया गया था। इस पृष्ठभूमि में भूमि के मूल उद्देश्य, स्वामित्व एवं प्रबंधन को लेकर उत्पन्न असमंजस दूर करने के लिए संबंधित अभिलेखों की जाँच आवश्यक है।
समाजजनों ने प्रमुख प्रस्ताव के रूप में शासन‑प्रशासन के मार्गदर्शन एवं आवश्यक निगरानी में समाज की उक्त भूमि पर सभी संबंधित समाजजनों की व्यापक आम बैठक आयोजित करने की माँग की। बैठक की सूचना पर्याप्त समय पहले सार्वजनिक की जाए, सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले और किसी भी व्यक्ति या समूह को उपेक्षित महसूस न हो। बैठक के बाद पंजीकृत नियमावली एवं लागू कानून के अनुसार सर्वसम्मति से नई समिति गठित करने या निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया अपनाने का प्रस्ताव रखा गया।
ज्ञापन में यह भी अनुरोध किया गया कि भूमि की मूल पंजीकृत रजिस्ट्री, राजस्व अभिलेख, चंदा रसीदें तथा मंदिर निर्माण से जुड़े आर्थिक दस्तावेजों की जाँच कर वास्तविक वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जाँच में किसी संज्ञेय अपराध के तथ्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और भूमि के स्वामित्व का अंतिम निर्धारण सक्षम राजस्व अथवा न्यायिक प्राधिकारी द्वारा किया जाए। समाजजनों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी विशेष पक्ष को अपमानित करना नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना, विश्वास बहाल करना और धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए व्यवस्थित व्यवस्था बनाना है।
ज्ञापन के अनुसार, भूमि 25 वर्ष पूर्व धार्मिक एवं सामाजिक उद्देश्यों के लिए खरीदी गई थी और रजिस्ट्री पाँच व्यक्तियों के नाम पर कराई गई थी। समाजजनों का कहना है कि भूमि क्रय एवं धार्मिक‑सामाजिक कार्यों के लिए सामूहिक आर्थिक सहयोग भी जुटाया गया था। इस पृष्ठभूमि में भूमि के मूल उद्देश्य, स्वामित्व एवं प्रबंधन को लेकर उत्पन्न असमंजस दूर करने के लिए संबंधित अभिलेखों की जाँच आवश्यक है।
समाजजनों ने प्रमुख प्रस्ताव के रूप में शासन‑प्रशासन के मार्गदर्शन एवं आवश्यक निगरानी में समाज की उक्त भूमि पर सभी संबंधित समाजजनों की व्यापक आम बैठक आयोजित करने की माँग की। बैठक की सूचना पर्याप्त समय पहले सार्वजनिक की जाए, सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले और किसी भी व्यक्ति या समूह को उपेक्षित महसूस न हो। बैठक के बाद पंजीकृत नियमावली एवं लागू कानून के अनुसार सर्वसम्मति से नई समिति गठित करने या निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया अपनाने का प्रस्ताव रखा गया।
ज्ञापन में यह भी अनुरोध किया गया कि भूमि की मूल पंजीकृत रजिस्ट्री, राजस्व अभिलेख, चंदा रसीदें तथा मंदिर निर्माण से जुड़े आर्थिक दस्तावेजों की जाँच कर वास्तविक वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जाँच में किसी संज्ञेय अपराध के तथ्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और भूमि के स्वामित्व का अंतिम निर्धारण सक्षम राजस्व अथवा न्यायिक प्राधिकारी द्वारा किया जाए। समाजजनों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी विशेष पक्ष को अपमानित करना नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना, विश्वास बहाल करना और धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए व्यवस्थित व्यवस्था बनाना है।