Politics
बरेली की राजनीति में बड़ा बदलाव: पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी के साथ सपा में शामिल
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आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी बेटी के साथ समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में दोनों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बरेली की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होने का फैसला लिया है। वे अपनी बेटी के साथ पार्टी में शामिल हुए, जिनकी सदस्यता लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में दी गई। धर्मेंद्र कश्यप के इस कदम को बरेली और आंवला क्षेत्र की राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से की थी, जहां से उन्हें वर्ष 2002 में विधायक चुना गया था। इसके बाद 2003 में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और मुलायम सिंह यादव सरकार में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और आंवला लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। 2019 में भी उन्होंने जीत दर्ज की, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
हाल के दिनों में भाजपा से उनकी नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई थीं, विशेषकर राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद। सोशल मीडिया पर उनकी 'टाटा बाय-बाय' पोस्ट और अखिलेश यादव से मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी थी। अब सपा में शामिल होने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समीकरण को मजबूत करने में जुटे हैं। धर्मेंद्र कश्यप जैसे वरिष्ठ नेता के शामिल होने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले बदायूं के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य भी सपा में शामिल हुए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नेताओं के दल बदलने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं।
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से की थी, जहां से उन्हें वर्ष 2002 में विधायक चुना गया था। इसके बाद 2003 में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और मुलायम सिंह यादव सरकार में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और आंवला लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। 2019 में भी उन्होंने जीत दर्ज की, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
हाल के दिनों में भाजपा से उनकी नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई थीं, विशेषकर राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद। सोशल मीडिया पर उनकी 'टाटा बाय-बाय' पोस्ट और अखिलेश यादव से मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी थी। अब सपा में शामिल होने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समीकरण को मजबूत करने में जुटे हैं। धर्मेंद्र कश्यप जैसे वरिष्ठ नेता के शामिल होने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले बदायूं के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य भी सपा में शामिल हुए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नेताओं के दल बदलने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं।