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बोरगांव के दो छात्र, 20 वर्षीया माइक्रो बायो डिग्रीधारी और 12 वर्षीया, आबूद रोड पर सब्जी बेचते हुए दिखे
बोरगांव से लौटते समय आबूद रोड पर दो छात्र, एक 20 वर्षीया माइक्रो बायो डिग्रीधारी और दूसरा 12 वर्षीया, अपने पिता के साथ मिलकर ताजी सब्जियाँ बेचते हुए मिले।
बोरगांव से लौटते समय आबूद रोड पर दो छात्र, एक 20 वर्षीया माइक्रो बायो डिग्रीधारी और दूसरा 12 वर्षीया, अपने पिता के साथ मिलकर ताजी सब्जियाँ बेचते हुए मिले। दोनों ने मिलकर अपने पापा का हाथ बटा कर व्यापार का अनुभव प्राप्त किया।
इन बच्चों ने केवल सब्जी नहीं बेची, बल्कि भविष्य के व्यापार में प्रशिक्षण भी लिया। वे दिखा रहे हैं कि कैसे बचपन से ही व्यापार की समझ विकसित की जा सकती है।
सरकारी नौकरियों की उपलब्धता केवल ढाई से तीन प्रतिशत तक सीमित है, इसलिए सभी को रोजगार नहीं मिल पाता। ऐसे में यह अनुभव बच्चों को आर्थिक मामलों में अधिक समझदार बना सकता है।
यदि आप इस रोड से गुजरते हैं और इन बच्चों को देखते हैं, तो उनकी ताजी सब्जियाँ जरूर खरीदें और उनके उत्साह को बढ़ावा दें। वे भविष्य के बड़े व्यापारी, उद्योगपति या सरकारी अधिकारी बन सकते हैं।
इन बच्चों ने केवल सब्जी नहीं बेची, बल्कि भविष्य के व्यापार में प्रशिक्षण भी लिया। वे दिखा रहे हैं कि कैसे बचपन से ही व्यापार की समझ विकसित की जा सकती है।
सरकारी नौकरियों की उपलब्धता केवल ढाई से तीन प्रतिशत तक सीमित है, इसलिए सभी को रोजगार नहीं मिल पाता। ऐसे में यह अनुभव बच्चों को आर्थिक मामलों में अधिक समझदार बना सकता है।
यदि आप इस रोड से गुजरते हैं और इन बच्चों को देखते हैं, तो उनकी ताजी सब्जियाँ जरूर खरीदें और उनके उत्साह को बढ़ावा दें। वे भविष्य के बड़े व्यापारी, उद्योगपति या सरकारी अधिकारी बन सकते हैं।