📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / A.Savin
देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जाति भेदभाव की निंदा, सामाजिक बुराइयों को जारी बताया
✍️ Amar Ujala · Maharashtra
🗓 05 सित. 2026, 10:35 AM
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि भारत ने चाँद पर कदम रखे हों, फिर भी जाति‑भेद का दुष्प्रभाव समाज में बना हुआ है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के एक बेंच ने हालिया सुनवाई में जाति‑भेद पर कठोर टिप्पणी की, यह कहा कि भारत ने चाँद पर कदम रखे हों या नहीं, सामाजिक विषमता अभी भी गहरी जड़ें जमा चुकी है।
जजों ने यह बात एक सार्वजनिक संस्थान में भेदभाव के खिलाफ दायर याचिका के संदर्भ में कही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि न्यायालय प्रणाली इस प्रकार की प्रणालीगत असमानता को रोकने के लिए सक्रिय है। उन्होंने मौजूदा विरोध‑भेदभाव कानूनों के कड़ाई से लागू करने की अपील की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी विकास के साथ सामाजिक न्याय को जोड़ने वाले न्यायिक प्रवृत्ति को दर्शाती है। यह स्मरण कराती है कि तकनीकी उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक समानता भी प्रगति का मापदंड है।
हाईकोर्ट ने सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से जाति‑भेद को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया, यह संकेत देते हुए कि वास्तविक प्रगति केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशिता से तय होती है।
जजों ने यह बात एक सार्वजनिक संस्थान में भेदभाव के खिलाफ दायर याचिका के संदर्भ में कही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि न्यायालय प्रणाली इस प्रकार की प्रणालीगत असमानता को रोकने के लिए सक्रिय है। उन्होंने मौजूदा विरोध‑भेदभाव कानूनों के कड़ाई से लागू करने की अपील की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी विकास के साथ सामाजिक न्याय को जोड़ने वाले न्यायिक प्रवृत्ति को दर्शाती है। यह स्मरण कराती है कि तकनीकी उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक समानता भी प्रगति का मापदंड है।
हाईकोर्ट ने सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से जाति‑भेद को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया, यह संकेत देते हुए कि वास्तविक प्रगति केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशिता से तय होती है।