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29 अक्टू. 2026•
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बेमौसम बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर! खेतों में बिछी धान की फसल, अन्नदाताओं की मेहनत पर फिरा पानी

✍️ रिपोर्टर: राजभान कुशवाहा 🗓 29 अक्टू. 2026, 03:23 PM 👁 29
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बेमौसम बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर! खेतों में बिछी धान की फसल, अन्नदाताओं की मेहनत पर फिरा पानी

शहडोल, मध्य प्रदेश | 29 अक्टूबर 2026

शहडोल/बुढ़ार। बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धान की फसल तैयार होने के समय हुई बारिश से किसानों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक सुनहरी धान की बालियां लहलहा रही थीं, वहां अब बारिश के कारण फसल गिरने और खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।

किसानों के अरमानों पर बरसा आफत का पानी

किसानों ने महीनों तक कड़ी मेहनत और हजारों रुपये खर्च करके धान की फसल तैयार की थी। लेकिन कटाई के समय मौसम की बेरुखी ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने, धान की बालियां जमीन पर गिरने और कटाई में देरी होने से उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।

कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने बड़ा संकट

खाद, बीज, कीटनाशक और मजदूरी पर भारी खर्च करने वाले किसानों के सामने अब लागत निकालना भी चुनौती बन सकता है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो धान की फसल को और अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका है।

प्रशासन से तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग

प्रभावित किसानों के हित में राजस्व एवं कृषि विभाग द्वारा खेतों का तत्काल निरीक्षण कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाना जरूरी है। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पात्र प्रभावित किसानों को राहत एवं मुआवजा दिलाने की दिशा में कदम उठाएगा।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब तक मौसम की मार झेलता रहेगा अन्नदाता

कभी सूखे की मार, कभी खाद-बीज की महंगाई और अब बेमौसम बारिश! खेती में लगातार बढ़ती चुनौतियों के बीच किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेष टिप्पणी: खेतों में पसीना बहाकर देश का पेट भरने वाला किसान जब खुद संकट में हो, तो उसकी पीड़ा सुनना और समय पर राहत पहुंचाना शासन-प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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