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15 अक्टू. 2026•
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बलिया: पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के पुत्र रंजीत चौधरी की राजनीतिक भूमिका पर टिकी निगाहें
राजनीति

बलिया: पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के पुत्र रंजीत चौधरी की राजनीतिक भूमिका पर टिकी निगाहें

✍️ रिपोर्टर: ANAND KUMAR PANDEY 🗓 15 अक्टू. 2026, 07:28 AM 👁 19
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बलिया जिले के बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता रंजीत चौधरी, अपने पिता स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की राह पर हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में उनकी संभावित दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ता रंजीत चौधरी, अपने पिता स्वर्गीय रामगोविंद चौधरी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। रामगोविंद चौधरी, जो आठ बार विधायक रहे, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और 2017 से 2022 तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहे, उनके इकलौते पुत्र रंजीत चौधरी भी पिता के राजनीतिक जीवन के दौरान क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।

रामगोविंद चौधरी के अस्वस्थ रहने के दौरान रंजीत चौधरी ने क्षेत्रीय राजनीतिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी बढ़ाई थी और समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों व बैठकों में नियमित रूप से शामिल होते रहे हैं। सितंबर 2026 में पिता के निधन के बाद, बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों में उनकी संभावित दावेदारी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

हालांकि, विधानसभा चुनाव लड़ने और पार्टी का टिकट मिलने के संबंध में समाजवादी पार्टी की ओर से रंजीत चौधरी की उम्मीदवारी की कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। रामगोविंद चौधरी का बांसडीह और बलिया क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रहा है, और उनके निधन के बाद समर्थकों के बीच यह उत्सुकता है कि उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका आगे कैसे जारी रहेगी।

रंजीत चौधरी के सामने अब क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान को और मजबूत करने तथा पार्टी संगठन के साथ अपनी भूमिका को सुदृढ़ करने की चुनौती है। उनकी आगामी राजनीतिक यात्रा, विशेषकर 2027 के विधानसभा चुनावों में उनकी भूमिका, क्षेत्रीय राजनीतिक हलकों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है और यह काफी हद तक समाजवादी पार्टी के निर्णयों तथा भविष्य की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
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