स्वास्थ्य
बालाघाट के पांच वर्षीय बालक को जबलपुर में सफल सर्जरी के बाद मिला नया जीवन
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बालाघाट के बैगा जनजाति के बालक सगन लाल के सफल उपचार पर प्रसन्नता व्यक्त की। आरबीएसके टीम और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से बालक को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका सफलतापूर्वक इलाज होकर उसे घर भेजा गया।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम मातला निवासी पांच वर्षीय बैगा जनजातीय बालक सगन लाल धुर्वे को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सफल उपचार के बाद घर लौटने का मौका मिला है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम, स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी विभागों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और आरबीएसके टीम ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद किसी भी बच्चे को उपचार से वंचित रहने नहीं दिया।
सगन लाल को जीभ के असामान्य रूप से बढ़ने (मैक्रोग्लॉसिया) तथा लिम्फेटिक/वैस्कुलर मलफ़ॉर्मेशन की समस्या थी। आरबीएसके टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान इस बीमारी की पहचान की। हालांकि, परिवार की आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों और अंधविश्वास के कारण अस्पताल पहुंचने में कठिनाइयां थीं, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस प्रशासन के समन्वित प्रयासों से बालक को जिला चिकित्सालय बालाघाट से बेहतर उपचार के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।
30 सितंबर 2026 को बालक को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. विकेश अग्रवाल की निगरानी में उसका उपचार किया गया। 8 अक्टूबर 2026 को सफल उपचार के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया और एम्बुलेंस के जरिए उसके घर भेजा गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के निर्देशन में उपचार और देखरेख की विशेष व्यवस्था की गई, जबकि उप संचालक डॉ. सोनाली ठाकरे ने जबलपुर में उपचार के समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।
इस प्रक्रिया में जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक राजाराम चक्रवर्ती का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने बालक को ग्राम मातला से जबलपुर तक पहुंचाने में मदद की। उपचार की नियमित निगरानी के लिए कलेक्टर कुमार सत्यम एवं पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा को प्रतिदिन जानकारी भेजी जाती रही। आरबीएसके टीम, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन और मेडिकल कॉलेज जबलपुर के चिकित्सकों के मिले-जुले प्रयासों के फलस्वरूप बालक का सफल उपचार संभव हो पाया।
सगन लाल को जीभ के असामान्य रूप से बढ़ने (मैक्रोग्लॉसिया) तथा लिम्फेटिक/वैस्कुलर मलफ़ॉर्मेशन की समस्या थी। आरबीएसके टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान इस बीमारी की पहचान की। हालांकि, परिवार की आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों और अंधविश्वास के कारण अस्पताल पहुंचने में कठिनाइयां थीं, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस प्रशासन के समन्वित प्रयासों से बालक को जिला चिकित्सालय बालाघाट से बेहतर उपचार के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।
30 सितंबर 2026 को बालक को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. विकेश अग्रवाल की निगरानी में उसका उपचार किया गया। 8 अक्टूबर 2026 को सफल उपचार के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया और एम्बुलेंस के जरिए उसके घर भेजा गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के निर्देशन में उपचार और देखरेख की विशेष व्यवस्था की गई, जबकि उप संचालक डॉ. सोनाली ठाकरे ने जबलपुर में उपचार के समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।
इस प्रक्रिया में जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक राजाराम चक्रवर्ती का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने बालक को ग्राम मातला से जबलपुर तक पहुंचाने में मदद की। उपचार की नियमित निगरानी के लिए कलेक्टर कुमार सत्यम एवं पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा को प्रतिदिन जानकारी भेजी जाती रही। आरबीएसके टीम, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन और मेडिकल कॉलेज जबलपुर के चिकित्सकों के मिले-जुले प्रयासों के फलस्वरूप बालक का सफल उपचार संभव हो पाया।