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बख्तियारपुर: सीढ़ी घाट पर महिला पुलिसकर्मी द्वारा बुजुर्ग दुकानदार का सामान पलटने का वीडियो वायरल, संवेदनशीलता पर उठे सवाल
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जीतिया पर्व के अवसर पर बख्तियारपुर के सीढ़ी घाट पर एक महिला पुलिस पदाधिकारी द्वारा सड़क किनारे दुकान लगाए एक बुजुर्ग महिला दुकानदार का सामान कथित तौर पर उलट दिए जाने का वीडियो सामने आया है। इस घटना के बाद पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पटना।बख्तियारपुर के सीढ़ी घाट पर जीतिया पर्व के दौरान एक महिला पुलिस पदाधिकारी द्वारा कथित तौर पर एक बुजुर्ग महिला दुकानदार का सामान पन्नी समेत उलट दिए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार और गरीब फुटकर विक्रेताओं के प्रति संवेदनशीलता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग महिला सीढ़ी घाट के समीप पन्नी बिछाकर चूड़ी, लहठी, सिंदूर जैसी महिलाओं की श्रृंगार सामग्री बेच रही थी। पर्व के अवसर पर वह छोटी-सी अस्थायी दुकान लगाकर अपने परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करती थी। घाट क्षेत्र में भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने के क्रम में एक महिला दारोगा द्वारा उक्त दुकान को हटाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इस दौरान महिला का सामान पन्नी समेत पलट दिया गया, जिससे उसकी सामग्री सड़क पर बिखर गई। घटना से बुजुर्ग महिला काफी मायूस और परेशान दिखी।
हालांकि, पुलिस की ओर से इस घटना के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। यदि घाट क्षेत्र में अतिक्रमण या भीड़ के कारण दुकान हटाना आवश्यक भी था, तो भी कार्रवाई के दौरान गरीब और अस्थायी विक्रेताओं के साथ मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता भी पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण अंग है।
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ऐसे मामलों में यह भी आवश्यक है कि पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रण, तनावपूर्ण परिस्थितियों और कमजोर वर्ग के लोगों से व्यवहार को लेकर समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से अपमानित न होना पड़े या आर्थिक नुकसान न हो। पर्व-त्योहारों पर घाटों और धार्मिक स्थलों के आसपास बड़ी संख्या में फुटकर दुकानदार पहुंचते हैं, ऐसे में सिविल प्रशासन द्वारा वैकल्पिक हाट या निर्धारित अस्थायी बाजार की व्यवस्था करने से अव्यवस्था और अतिक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है और छोटे दुकानदारों को भी रोजगार का अवसर मिल सकेगा।
जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग महिला सीढ़ी घाट के समीप पन्नी बिछाकर चूड़ी, लहठी, सिंदूर जैसी महिलाओं की श्रृंगार सामग्री बेच रही थी। पर्व के अवसर पर वह छोटी-सी अस्थायी दुकान लगाकर अपने परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करती थी। घाट क्षेत्र में भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने के क्रम में एक महिला दारोगा द्वारा उक्त दुकान को हटाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इस दौरान महिला का सामान पन्नी समेत पलट दिया गया, जिससे उसकी सामग्री सड़क पर बिखर गई। घटना से बुजुर्ग महिला काफी मायूस और परेशान दिखी।
हालांकि, पुलिस की ओर से इस घटना के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। यदि घाट क्षेत्र में अतिक्रमण या भीड़ के कारण दुकान हटाना आवश्यक भी था, तो भी कार्रवाई के दौरान गरीब और अस्थायी विक्रेताओं के साथ मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता भी पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण अंग है।
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ऐसे मामलों में यह भी आवश्यक है कि पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रण, तनावपूर्ण परिस्थितियों और कमजोर वर्ग के लोगों से व्यवहार को लेकर समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से अपमानित न होना पड़े या आर्थिक नुकसान न हो। पर्व-त्योहारों पर घाटों और धार्मिक स्थलों के आसपास बड़ी संख्या में फुटकर दुकानदार पहुंचते हैं, ऐसे में सिविल प्रशासन द्वारा वैकल्पिक हाट या निर्धारित अस्थायी बाजार की व्यवस्था करने से अव्यवस्था और अतिक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है और छोटे दुकानदारों को भी रोजगार का अवसर मिल सकेगा।