📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NASA, ESA, and the Hubble Heritage Team (STScI/AUR
शिक्षा
बीजेपी ने सावधानी बरतने का संकेत, केंद्र यूजीसी इक्विटी नियमों में बदलाव की तैयारी
✍️ Hindustan Times
🗓 07 नव. 2026, 10:06 AM
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बिहार भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र के यूजीसी इक्विटी नियमों में बदलाव के दौरान सावधानी बरतने का आह्वान किया है।
नई दिल्ली, 7 नवंबर (एचटी) – भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के इक्विटी नियमों में संशोधन की तैयारी के साथ सावधानी बरतने का संकेत दिया है। पार्टी के नेताओं ने कहा कि जल्दबाजी में किए गए बदलाव विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और व्यापक नीति ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र उन प्रावधानों को बदलने की योजना बना रहा है जो विश्वविद्यालयों के वित्त पोषण और शासन में इक्विटी विचारों को नियंत्रित करते हैं। प्रस्तावित संशोधन में वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व और मौजूदा वैधानिक दायित्वों के अनुपालन को लेकर मुद्दे शामिल हैं।
बीजेपी ने अभी तक विशिष्ट आपत्तियों को नहीं बताया है, परन्तु इस सावधानीपूर्ण रुख से यह स्पष्ट होता है कि आगामी विधायी सत्रों से पहले पार्टी इस मुद्दे को बारीकी से देख रही है। संभवतः पार्टी संसद में प्रश्न उठाएगी ताकि संशोधित नियम समावेशिता और संस्थागत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाये रखें।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी के इक्विटी नियम कई वर्षों से नीति चर्चा का केंद्र रहे हैं, और किसी भी बदलाव का असर भारत के 1,000 से अधिक विश्वविद्यालयों पर पड़ेगा। विश्वविद्यालयों, भर्ती, फंडिंग और शासन संरचनाओं पर प्रभाव का आकलन करने के लिये शैक्षणिक समुदाय अंतिम मसौदा का इंतजार कर रहा है।
सरकार ने अभी तक अंतिम अधिसूचना की समयसीमा नहीं दी है, परन्तु अधिकारियों ने कहा कि औपचारिक संशोधन से पहले विश्वविद्यालयों और नागरिक समाज समूहों के साथ परामर्श प्रक्रिया चलायी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र उन प्रावधानों को बदलने की योजना बना रहा है जो विश्वविद्यालयों के वित्त पोषण और शासन में इक्विटी विचारों को नियंत्रित करते हैं। प्रस्तावित संशोधन में वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व और मौजूदा वैधानिक दायित्वों के अनुपालन को लेकर मुद्दे शामिल हैं।
बीजेपी ने अभी तक विशिष्ट आपत्तियों को नहीं बताया है, परन्तु इस सावधानीपूर्ण रुख से यह स्पष्ट होता है कि आगामी विधायी सत्रों से पहले पार्टी इस मुद्दे को बारीकी से देख रही है। संभवतः पार्टी संसद में प्रश्न उठाएगी ताकि संशोधित नियम समावेशिता और संस्थागत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाये रखें।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी के इक्विटी नियम कई वर्षों से नीति चर्चा का केंद्र रहे हैं, और किसी भी बदलाव का असर भारत के 1,000 से अधिक विश्वविद्यालयों पर पड़ेगा। विश्वविद्यालयों, भर्ती, फंडिंग और शासन संरचनाओं पर प्रभाव का आकलन करने के लिये शैक्षणिक समुदाय अंतिम मसौदा का इंतजार कर रहा है।
सरकार ने अभी तक अंतिम अधिसूचना की समयसीमा नहीं दी है, परन्तु अधिकारियों ने कहा कि औपचारिक संशोधन से पहले विश्वविद्यालयों और नागरिक समाज समूहों के साथ परामर्श प्रक्रिया चलायी जाएगी।