📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Raunak Singh
राजनीति
बिजेपी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में 287 करोड़ रुपये खर्च किए, कांग्रेस के पाँच चुनावों से अधिक
✍️ theweek.in
🗓 24 सित. 2026, 01:33 PM
👁 18
बिजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 287 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कांग्रेस के पाँच पिछले चुनावों के कुल खर्च से अधिक है, दि वीके ने बताया।
भारतीय जनता पार्टी (बिजेपी) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए लगभग 287 करोड़ रुपये खर्च किए, यह आंकड़ा दि वीके द्वारा प्रकाशित डेटा पर आधारित है। इस खर्च में विज्ञापन, रैलियां और लॉजिस्टिक समर्थन शामिल हैं, और यह कांग्रेस द्वारा पाँच अलग-अलग चुनावों में कुल खर्च से अधिक है, जिससे वित्तीय अंतर स्पष्ट हो रहा है।
चुनाव आयोग द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, एक ही राज्य के चुनाव में बिजेपी का खर्च कांग्रेस के कई चुनावों के कुल खर्च से अधिक है, जो दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच वित्तीय अंतर को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का खर्च पार्टी के उम्मीदवारों की दृश्यता और जमीनी स्तर पर काम को बढ़ा सकता है।
पश्चिम बंगाल में बिजेपी की यह बड़ी निवेश राशि इस तथ्य को दर्शाती है कि वह एक ऐसी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहाँ पारम्परिक रूप से क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा रहा है। हालिया वर्षों में पार्टी ने कुछ प्रगति की है, पर 287 करोड़ रुपये का बजट आगामी चुनाव में वोट शेयर को सीटों में बदलने की एक आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।
दि वीके की रिपोर्ट ने फंड के स्रोतों का विस्तृत विवरण नहीं दिया, पर यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चुनाव खर्च फाइलिंग्स पर आधारित है। यह आंकड़ा भारतीय चुनावों में धन के प्रभाव और पारदर्शिता की आवश्यकता पर चर्चा को और तेज़ करता है, जहाँ कई पक्ष कड़े नियमन की मांग कर रहे हैं।
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नज़दीक आती है, बिजेपी की वित्तीय शक्ति पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों, कोलकाता से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक, प्रचार की तीव्रता को निर्धारित करेगी और संभवतः मतदाता संपर्क एवं मीडिया कवरेज को भी प्रभावित करेगी।
चुनाव आयोग द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, एक ही राज्य के चुनाव में बिजेपी का खर्च कांग्रेस के कई चुनावों के कुल खर्च से अधिक है, जो दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच वित्तीय अंतर को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का खर्च पार्टी के उम्मीदवारों की दृश्यता और जमीनी स्तर पर काम को बढ़ा सकता है।
पश्चिम बंगाल में बिजेपी की यह बड़ी निवेश राशि इस तथ्य को दर्शाती है कि वह एक ऐसी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहाँ पारम्परिक रूप से क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा रहा है। हालिया वर्षों में पार्टी ने कुछ प्रगति की है, पर 287 करोड़ रुपये का बजट आगामी चुनाव में वोट शेयर को सीटों में बदलने की एक आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।
दि वीके की रिपोर्ट ने फंड के स्रोतों का विस्तृत विवरण नहीं दिया, पर यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चुनाव खर्च फाइलिंग्स पर आधारित है। यह आंकड़ा भारतीय चुनावों में धन के प्रभाव और पारदर्शिता की आवश्यकता पर चर्चा को और तेज़ करता है, जहाँ कई पक्ष कड़े नियमन की मांग कर रहे हैं।
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नज़दीक आती है, बिजेपी की वित्तीय शक्ति पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों, कोलकाता से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक, प्रचार की तीव्रता को निर्धारित करेगी और संभवतः मतदाता संपर्क एवं मीडिया कवरेज को भी प्रभावित करेगी।