📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President's Secretariat
राजनीति
बीजेपी ने पूछा, क्या केजरीवाल पं. सरकार का इस्तीफा देंगे हाई कोर्ट के स्टॉप के बाद
✍️ The Economic Times
🗓 13 अग. 2026, 05:18 PM
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बीजेपी ने पूछा कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पं. सरकार से इस्तीफा देंगे, जब हाई कोर्ट ने फार्मा अधिकारियों की भर्ती पर रोक लगा दी।
बीजेपी ने सार्वजनिक रूप से पूछा कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पं. सरकार से इस्तीफा देंगे, हाई कोर्ट के आदेश के बाद जो फार्मा अधिकारियों की भर्ती पर रोक लगा चुका है।
हाई कोर्ट की इस रोक का कारण यह था कि पं. प्रशासन ने फार्मा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया था, जिससे प्रक्रियागत अनियमितताओं की शक्या उठी। इस आदेश ने भर्ती को तब तक रोका जब तक कि एक विस्तृत समीक्षा नहीं हो जाती।
केजरीवाल की पं. सरकार में भागीदारी राजनीतिक बहस का विषय रही है, आलोचकों का कहना है कि उनके दोहरी भूमिकाएँ हितों के टकराव का कारण बन सकती हैं। बीजेपी का यह सवाल केजरीवाल पर उनके प्रतिबद्धताओं को स्पष्ट करने और कानूनी चुनौतियों का सामना करने का दबाव बढ़ा रहा है।
केजरीवाल ने अभी तक बीजेपी के सवाल का औपचारिक जवाब नहीं दिया है, और कोई इस्तीफा घोषित नहीं हुआ है। कानूनी प्रक्रियाएँ जारी रहने के कारण राजनीतिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस्तीफा देने से पं. सरकार में पुनर्गठन हो सकता है और राज्य में शासक दल व विपक्ष के बीच गतिशीलता बदल सकती है।
हाई कोर्ट की इस रोक का कारण यह था कि पं. प्रशासन ने फार्मा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया था, जिससे प्रक्रियागत अनियमितताओं की शक्या उठी। इस आदेश ने भर्ती को तब तक रोका जब तक कि एक विस्तृत समीक्षा नहीं हो जाती।
केजरीवाल की पं. सरकार में भागीदारी राजनीतिक बहस का विषय रही है, आलोचकों का कहना है कि उनके दोहरी भूमिकाएँ हितों के टकराव का कारण बन सकती हैं। बीजेपी का यह सवाल केजरीवाल पर उनके प्रतिबद्धताओं को स्पष्ट करने और कानूनी चुनौतियों का सामना करने का दबाव बढ़ा रहा है।
केजरीवाल ने अभी तक बीजेपी के सवाल का औपचारिक जवाब नहीं दिया है, और कोई इस्तीफा घोषित नहीं हुआ है। कानूनी प्रक्रियाएँ जारी रहने के कारण राजनीतिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस्तीफा देने से पं. सरकार में पुनर्गठन हो सकता है और राज्य में शासक दल व विपक्ष के बीच गतिशीलता बदल सकती है।