📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Affidavit 2019
अपराध
डिलिप घोश ने वेस्ट बंगाल में गैंगस्टर्स से निपटने के लिए पुलिस को स्वतंत्र हाथ देने की पुकार
✍️ The Hindu
🗓 23 अग. 2026, 02:33 PM
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बीजेपी प्रवक्ता डिलिप घोश ने पश्चिम बंगाल में आपराधिक गैंगों से निपटने के लिए पुलिस को स्वतंत्र हाथ देने की मांग की है।
बीजेपी नेता डिलिप घोश ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पुलिस को संगठित अपराध और गैंग गतिविधियों से निपटने के लिए पूर्ण अधिकार दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नौकरशाही की बाधाओं और राजनीतिक हस्तक्षेप ने प्रभावी कानून प्रवर्तन में रुकावटें पैदा की हैं, जिससे आपराधिक नेटवर्क बिना सजा के काम कर रहे हैं।
कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोश ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि जांच और गिरफ्तारी में देरी करने वाले प्रक्रियात्मक अड़चनें हटाई जाएँ। उन्होंने कहा कि "स्वतंत्र हाथ" मिलने से पुलिस तेज कार्रवाई, बेहतर खुफिया साझाकरण और गैंग‑संबंधी हिंसा के खिलाफ सख्त रोकथाम कर सकेगी।
यह बयान पश्चिम बंगाल के कई जिलों में गैंग‑संबंधी अपराधों में वृद्धि की चिंताओं के बीच आया है, जहाँ आपराधिक समूहों द्वारा जबरन वसूली, अवैध ज़मीनी कब्जा और हिंसक टकराव की घटनाएँ रिपोर्ट की गई हैं। हालिया महीनों में पुलिस ने कई ऑपरेशन शुरू किए हैं, पर घोश का मानना है कि सार्वजनिक सुरक्षा बहाल करने के लिए अधिक आक्रामक रुख आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मांग राज्य में सत्ताधारी दल और विपक्षी नेताओं के बीच कानून‑व्यवस्था नीतियों को लेकर चल रहे तनाव को दर्शाती है। लेखन के समय पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोश ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि जांच और गिरफ्तारी में देरी करने वाले प्रक्रियात्मक अड़चनें हटाई जाएँ। उन्होंने कहा कि "स्वतंत्र हाथ" मिलने से पुलिस तेज कार्रवाई, बेहतर खुफिया साझाकरण और गैंग‑संबंधी हिंसा के खिलाफ सख्त रोकथाम कर सकेगी।
यह बयान पश्चिम बंगाल के कई जिलों में गैंग‑संबंधी अपराधों में वृद्धि की चिंताओं के बीच आया है, जहाँ आपराधिक समूहों द्वारा जबरन वसूली, अवैध ज़मीनी कब्जा और हिंसक टकराव की घटनाएँ रिपोर्ट की गई हैं। हालिया महीनों में पुलिस ने कई ऑपरेशन शुरू किए हैं, पर घोश का मानना है कि सार्वजनिक सुरक्षा बहाल करने के लिए अधिक आक्रामक रुख आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मांग राज्य में सत्ताधारी दल और विपक्षी नेताओं के बीच कानून‑व्यवस्था नीतियों को लेकर चल रहे तनाव को दर्शाती है। लेखन के समय पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।