📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Defence
राजनीति
एसआईआर विवाद पर भाजपा ने कांग्रेस को किया जवाब, सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी से माफी व इस्तीफ़ा माँगा
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 27 सित. 2026, 07:16 PM
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चुनाव आयोग के एसआईआर स्पष्टीकरण के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस को टोकते हुए, सीएम मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राहुल गांधी से माफी और इस्तीफ़ा की मांग की।
चुनाव आयोग ने हाल ही में एसआईआर (शेड्यूल्ड इंडियन रेजिडेंट) विवाद पर स्पष्टीकरण दिया, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति में नई लहर उठी। आयोग के बयान को भाजपा ने अपनी स्थिति की पुष्टि के रूप में पढ़ा, जबकि कांग्रेस ने पहले इस मुद्दे को उठाया था।
इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता, मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का बयान राजनीतिक कारणों से प्रेरित है और तथ्यात्मक नहीं है।
दोनों नेताओं ने राहुल गांधी से माँगी है कि वह मध्य प्रदेश के लोगों से औपचारिक माफी करें और अपने किसी भी पद से इस्तीफ़ा दें। यह मांग जवाबदेही की भावना को दर्शाती है और आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश है।
यह टकराव भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को उजागर करता है, जहाँ भाजपा खुद को प्रक्रिया की रक्षा करने वाला पक्ष प्रस्तुत कर रही है, जबकि कांग्रेस को गलत सूचना फैलाने वाला बताया जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएँ आगामी राज्य चुनावों में मतदाता की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं, और एसआईआर मुद्दा पार्टी की विश्वसनीयता का परीक्षण बन सकता है।
इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता, मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का बयान राजनीतिक कारणों से प्रेरित है और तथ्यात्मक नहीं है।
दोनों नेताओं ने राहुल गांधी से माँगी है कि वह मध्य प्रदेश के लोगों से औपचारिक माफी करें और अपने किसी भी पद से इस्तीफ़ा दें। यह मांग जवाबदेही की भावना को दर्शाती है और आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश है।
यह टकराव भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को उजागर करता है, जहाँ भाजपा खुद को प्रक्रिया की रक्षा करने वाला पक्ष प्रस्तुत कर रही है, जबकि कांग्रेस को गलत सूचना फैलाने वाला बताया जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएँ आगामी राज्य चुनावों में मतदाता की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं, और एसआईआर मुद्दा पार्टी की विश्वसनीयता का परीक्षण बन सकता है।