📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ankit Gupta
धर्म
बिहार में रामलीला का अंत, दशहरा परंपरा बदल रही है
✍️ Daily Excelsior
🗓 19 अक्टू. 2026, 04:31 AM
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बिहार के कई गाँवों में दशहरा के दौरान आयोजित होने वाली पारंपरिक रामलीला अब नहीं हो रही, जिससे स्थानीय उत्सवों में बदलाव दिख रहा है।
बिहार के कई गाँवों में दशहरा के अवसर पर आयोजित होने वाली भव्य रामलीला अब नहीं देखी जा रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि भगवान राम के जीवन को मंचित करने वाली यह परम्परा इस वर्ष से ही बंद हो गई है, जबकि पहले यह आसपास के गाँवों के लोगों को आकर्षित करती थी।
पर्यवेक्षक इस गिरावट को सामाजिक पसंद में बदलाव और बड़े पैमाने पर मंचन की लागत के कारण मानते हैं। युवा वर्ग अब अधिक आधुनिक तरीकों से उत्सव मनाना पसंद कर रहा है, और सीमित संसाधनों के कारण पारंपरिक सेट‑अप बनाए रखना कठिन हो गया है।
संस्कृति विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रामलीला का धीरे‑धीरे समाप्त होना दशहरा के उत्सव के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है, हालांकि राज्य में अन्य रीति‑रिवाज और समारोह जारी हैं।
गाँव के मंचों पर मौन इस शताब्दी पुरानी परम्परा के बदलते स्वरूप को उजागर करता है, जिससे बिहार में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की चर्चा तेज़ हो रही है।
पर्यवेक्षक इस गिरावट को सामाजिक पसंद में बदलाव और बड़े पैमाने पर मंचन की लागत के कारण मानते हैं। युवा वर्ग अब अधिक आधुनिक तरीकों से उत्सव मनाना पसंद कर रहा है, और सीमित संसाधनों के कारण पारंपरिक सेट‑अप बनाए रखना कठिन हो गया है।
संस्कृति विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रामलीला का धीरे‑धीरे समाप्त होना दशहरा के उत्सव के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है, हालांकि राज्य में अन्य रीति‑रिवाज और समारोह जारी हैं।
गाँव के मंचों पर मौन इस शताब्दी पुरानी परम्परा के बदलते स्वरूप को उजागर करता है, जिससे बिहार में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की चर्चा तेज़ हो रही है।