📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jagadev Hembram
शिक्षा
बिहार के यूपीएससी अभ्यर्थी ने दिल्ली की लाइब्रेरी को अपना घर बना लिया
✍️ indianexpress.com
🗓 13 सित. 2026, 07:02 PM
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बिहार के एक यूपीएससी अभ्यर्थी ने दिल्ली में रहने की जगह न मिलने के कारण लाइब्रेरी में ही ठहराव किया है और एक ही भोजन पर निर्भर है।
बिहार के एक यूपीएससी अभ्यर्थी ने दिल्ली में किफायती आवास न मिलने के कारण सार्वजनिक पुस्तकालय में ही ठहराव किया है। वह दिन‑भर पुस्तकालय की अलमारियों के बीच पढ़ाई करता है और यहाँ की सुविधाओं को शरण तथा तैयारी दोनों के रूप में उपयोग करता है।
रिपोर्टों के अनुसार, वह केवल एक ही भोजन पर निर्भर है, जिससे उन कई अभ्यर्थियों की आर्थिक कठिनाइयाँ उजागर होती हैं जो कोचिंग और संसाधनों की पहुंच के लिए दिल्ली आते हैं। पुस्तकालय के खुले समय के दौरान वह परिसर में रह सकता है, हालांकि रात में ठहरना आधिकारिक रूप से अनुमति नहीं है।
यह मामला महानगरों में छात्रों और परीक्षा देने वालों के लिए किफायती आवास की कमी की व्यापक समस्या को दर्शाता है, जिससे शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी निकायों से विशेष समर्थन की मांग बढ़ रही है।
पुस्तकालय प्रबंधन ने इस व्यवस्था पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है, पर अभ्यर्थी अभी भी सार्वजनिक स्थान को अस्थायी आवास मानते हुए अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखता है।
यह कहानी उन कठिनाइयों को दर्शाती है जिनका सामना कई अभ्यर्थी सिविल सेवा के करियर के लिए करते हैं, अक्सर भारी आर्थिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों को पार करते हुए।
रिपोर्टों के अनुसार, वह केवल एक ही भोजन पर निर्भर है, जिससे उन कई अभ्यर्थियों की आर्थिक कठिनाइयाँ उजागर होती हैं जो कोचिंग और संसाधनों की पहुंच के लिए दिल्ली आते हैं। पुस्तकालय के खुले समय के दौरान वह परिसर में रह सकता है, हालांकि रात में ठहरना आधिकारिक रूप से अनुमति नहीं है।
यह मामला महानगरों में छात्रों और परीक्षा देने वालों के लिए किफायती आवास की कमी की व्यापक समस्या को दर्शाता है, जिससे शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी निकायों से विशेष समर्थन की मांग बढ़ रही है।
पुस्तकालय प्रबंधन ने इस व्यवस्था पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है, पर अभ्यर्थी अभी भी सार्वजनिक स्थान को अस्थायी आवास मानते हुए अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखता है।
यह कहानी उन कठिनाइयों को दर्शाती है जिनका सामना कई अभ्यर्थी सिविल सेवा के करियर के लिए करते हैं, अक्सर भारी आर्थिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों को पार करते हुए।