📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
टेक्नोलॉजी
बिहार सरकार ने ई‑कैबिनेट प्रणाली लागू कर पारदर्शी शासन का लक्ष्य
✍️ Asianet Newsable
🗓 05 नव. 2026, 03:52 AM
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बिहार सरकार ने कैबिनेट कार्यवाही को डिजिटल बनाने और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ई‑कैबिनेट प्रणाली लागू करने की योजना घोषित की।
पटना, बिहार – राज्य प्रशासन ने कैबिनेट बैठकों को सुगम बनाने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक कैबिनेट (ई‑कैबिनेट) मंच को लागू करने की स्वीकृति दी है। यह डिजिटल प्रणाली मंत्रियों और अधिकारियों को एजेंडा, दस्तावेज़ और निर्णयों तक ऑनलाइन पहुंच प्रदान करेगी, जिससे कागज़ी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी और सूचना का प्रवाह तेज़ होगा।
घोषणा के अनुसार, ई‑कैबिनेट बैठक के मिनट्स को वास्तविक समय में दर्ज करेगा और उन्हें एक सुरक्षित भंडार में संग्रहीत करेगा, जिससे अधिकृत कर्मचारियों को पिछले विचार-विमर्श को शीघ्रता से प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। इससे जवाबदेही में सुधार और नीति निर्णयों का स्पष्ट ऑडिट ट्रेल बनना अपेक्षित है।
सरकार ने बताया कि यह प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, पहले प्रमुख मंत्रालयों में पायलट चलाने के बाद पूरे कैबिनेट में विस्तार किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह तकनीक विभागों के बीच बेहतर समन्वय को समर्थन देगी और शासन को अधिक कुशल बनाएगी।
हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, इसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और देश भर में चल रही डिजिटल पहलों के साथ बिहार के शासन ढांचे को संरेखित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
घोषणा के अनुसार, ई‑कैबिनेट बैठक के मिनट्स को वास्तविक समय में दर्ज करेगा और उन्हें एक सुरक्षित भंडार में संग्रहीत करेगा, जिससे अधिकृत कर्मचारियों को पिछले विचार-विमर्श को शीघ्रता से प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। इससे जवाबदेही में सुधार और नीति निर्णयों का स्पष्ट ऑडिट ट्रेल बनना अपेक्षित है।
सरकार ने बताया कि यह प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, पहले प्रमुख मंत्रालयों में पायलट चलाने के बाद पूरे कैबिनेट में विस्तार किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह तकनीक विभागों के बीच बेहतर समन्वय को समर्थन देगी और शासन को अधिक कुशल बनाएगी।
हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, इसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और देश भर में चल रही डिजिटल पहलों के साथ बिहार के शासन ढांचे को संरेखित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।