📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
स्थानीय
बिहार में बख्तियारपुर‑राजगीर‑तिलैया रेलखंड दोहरीकरण के लिए 5,751 करोड़ रुपये का ई‑टेंडर जारी
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 06 सित. 2026, 10:17 AM
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बख्तियारपुर‑राजगीर‑तिलैया रेलखंड के करनौती‑बिहारशरीफ 26.292 किमी खंड के दोहरीकरण के लिए पूर्व मध्य रेलवे ने 5,751.14 करोड़ रुपये का ई‑टेंडर जारी किया है।
मंत्रालय ने बिहार के बख्तियारपुर‑राजगीर‑तिलैया रेलखंड के दोहरीकरण को आगे बढ़ाया है। करनौती से बिहारशरीफ तक के 26.292 किमी खंड के लिए 5,751.14 करोड़ रुपये का ई‑टेंडर जारी किया गया, जिससे कई सालों की योजना को जमीन पर उतारने की दिशा में पहला कदम उठाया गया।
पूर्व मध्य रेलवे के अधिकार में रहे इस परियोजना का उद्देश्य लाइन की क्षमता बढ़ाना, यात्रा समय घटाना और माल परिवहन को सुगम बनाना है। दोहरी ट्रैक के पूरा होने पर इस क्षेत्र में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी और आसपास के जिलों की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
ठेकेदारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर बोली प्रस्तुत करने की अपेक्षा है, और इस वर्ष के अंत तक निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। रेलवे ने मौजूदा सेवाओं में न्यूनतम व्यवधान रखने और आधुनिक निर्माण तकनीकों से कार्य को तेज़ी से पूरा करने का आश्वासन दिया है।
स्थानीय व्यवसायियों और यात्रियों ने इस विकास को सकारात्मक रूप से देखा है, क्योंकि इससे राजगीर और तिलैया जैसे प्रमुख पर्यटन एवं औद्योगिक केंद्रों से जुड़ाव बेहतर होगा। यह परियोजना राष्ट्रीय स्तर पर रेल बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने और क्षेत्रीय गतिशीलता को बढ़ाने के व्यापक लक्ष्य के साथ मेल खाती है।
समाप्ति की सटीक तिथि अभी घोषित नहीं हुई है, पर टेंडर जारी होना यह संकेत देता है कि परियोजना अब कागज़ से धरातल पर आ रही है, जिससे बिहार के परिवहन नेटवर्क को ठोस लाभ मिलने की उम्मीद है।
पूर्व मध्य रेलवे के अधिकार में रहे इस परियोजना का उद्देश्य लाइन की क्षमता बढ़ाना, यात्रा समय घटाना और माल परिवहन को सुगम बनाना है। दोहरी ट्रैक के पूरा होने पर इस क्षेत्र में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी और आसपास के जिलों की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
ठेकेदारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर बोली प्रस्तुत करने की अपेक्षा है, और इस वर्ष के अंत तक निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। रेलवे ने मौजूदा सेवाओं में न्यूनतम व्यवधान रखने और आधुनिक निर्माण तकनीकों से कार्य को तेज़ी से पूरा करने का आश्वासन दिया है।
स्थानीय व्यवसायियों और यात्रियों ने इस विकास को सकारात्मक रूप से देखा है, क्योंकि इससे राजगीर और तिलैया जैसे प्रमुख पर्यटन एवं औद्योगिक केंद्रों से जुड़ाव बेहतर होगा। यह परियोजना राष्ट्रीय स्तर पर रेल बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने और क्षेत्रीय गतिशीलता को बढ़ाने के व्यापक लक्ष्य के साथ मेल खाती है।
समाप्ति की सटीक तिथि अभी घोषित नहीं हुई है, पर टेंडर जारी होना यह संकेत देता है कि परियोजना अब कागज़ से धरातल पर आ रही है, जिससे बिहार के परिवहन नेटवर्क को ठोस लाभ मिलने की उम्मीद है।