📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Food Processing Industries
राजनीति
बिहार में ट्रांसजेंडर बोर्ड सदस्य की विवादित टिप्पणी पर चिराग पासवान को लेकर सियासत में उबाल
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 21 सित. 2026, 09:16 PM
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बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के डॉ. राजन सिंह की चिराग पासवान पर टिप्पणी वाला वीडियो सामने आने से राजनीतिक विवाद छिड़ गया, जहाँ जीतन राम मांझी ने जांच की मांग की।
बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के सदस्य डॉ. राजन सिंह की चिराग पासवान पर टिप्पणी वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तुरंत राजनीतिक उथल‑पुथल मच गई। यह क्लिप एक लोकप्रिय वीडियो प्लेटफ़ॉर्म पर अपलोड हुई और राज्य के कई नेताओं का ध्यान आकर्षित कर लिया।
पूर्व मंत्री जीतन राम मांझी, जो जेडीयू के वरिष्ठ नेता हैं, ने इस मामले में तेज़ जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी गंभीरता से ली जानी चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार और बोर्ड से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।
बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है, और ruling पार्टी ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि होने तक कोई टिप्पणी नहीं की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वीडियो वास्तविक है तो यह राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम तथा अन्य संबंधित क़ानूनों के तहत दंडनीय हो सकता है।
यह घटना सार्वजनिक अधिकारियों के आचरण और निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति संवेदनशीलता के बारे में चर्चा को फिर से उजागर कर रही है, विशेषकर बिहार जैसी राजनीतिक रूप से तीव्र स्थिति में।
पूर्व मंत्री जीतन राम मांझी, जो जेडीयू के वरिष्ठ नेता हैं, ने इस मामले में तेज़ जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी गंभीरता से ली जानी चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार और बोर्ड से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।
बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है, और ruling पार्टी ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि होने तक कोई टिप्पणी नहीं की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वीडियो वास्तविक है तो यह राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम तथा अन्य संबंधित क़ानूनों के तहत दंडनीय हो सकता है।
यह घटना सार्वजनिक अधिकारियों के आचरण और निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति संवेदनशीलता के बारे में चर्चा को फिर से उजागर कर रही है, विशेषकर बिहार जैसी राजनीतिक रूप से तीव्र स्थिति में।