📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Information and Public Relations Department, Gover
अपराध
बिहार पुलिस ने बफ़ैलो के मालिकाना हक के लिए डीएनए टेस्ट का आदेश दिया
✍️ The Economic Times
🗓 28 अग. 2026, 12:17 PM
👁 8
बिहार पुलिस ने संपत्ति विवाद में शामिल बफ़ैलो के मालिक को तय करने के लिए डीएनए परीक्षण का आदेश दिया, जो पशु स्वामित्व मामलों में एक अनोखा कदम है।
पटना, बिहार – एक असामान्य कदम में, स्थानीय पुलिस ने बफ़ैलो के मालिकाना हक को तय करने के लिए डीएनए परीक्षण का आदेश दिया है। यह पशु दो पक्षों के बीच चल रहे संपत्ति विवाद का केंद्र बना हुआ था, जिनमें से प्रत्येक इसे अपने संपत्ति का हिस्सा मानता है।
पुलिस ने बताया कि डीएनए परीक्षण में बफ़ैलो के जीन सामग्री की तुलना दावेदारों के पास मौजूद अन्य पशुओं के नमूनों से की जाएगी, जिससे निर्णय के लिए एक वस्तुनिष्ठ आधार मिल सके। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम विवाद को बढ़ने से रोकने और कानूनी रूप से सही समाधान सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
यह मामला ग्रामीण संपत्ति विवादों की बढ़ती जटिलता को उजागर करता है, जहाँ पशुधन अक्सर आर्थिक मूल्य का बड़ा हिस्सा होता है। परीक्षण परिणामों की प्रतीक्षा के दौरान, पुलिस ने दोनों पक्षों से आग्रह किया है कि वैज्ञानिक निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की टकराव से बचें।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में नागरिक स्वामित्व मामलों में डीएनए साक्ष्य का उपयोग दुर्लभ है, लेकिन यह भविष्य में मूल्यवान पशुओं से जुड़े विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
जांच बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में चल रही है, और प्रयोगशाला के परिणाम आने पर आगे की जानकारी प्रदान की जाएगी।
पुलिस ने बताया कि डीएनए परीक्षण में बफ़ैलो के जीन सामग्री की तुलना दावेदारों के पास मौजूद अन्य पशुओं के नमूनों से की जाएगी, जिससे निर्णय के लिए एक वस्तुनिष्ठ आधार मिल सके। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम विवाद को बढ़ने से रोकने और कानूनी रूप से सही समाधान सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
यह मामला ग्रामीण संपत्ति विवादों की बढ़ती जटिलता को उजागर करता है, जहाँ पशुधन अक्सर आर्थिक मूल्य का बड़ा हिस्सा होता है। परीक्षण परिणामों की प्रतीक्षा के दौरान, पुलिस ने दोनों पक्षों से आग्रह किया है कि वैज्ञानिक निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की टकराव से बचें।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में नागरिक स्वामित्व मामलों में डीएनए साक्ष्य का उपयोग दुर्लभ है, लेकिन यह भविष्य में मूल्यवान पशुओं से जुड़े विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
जांच बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में चल रही है, और प्रयोगशाला के परिणाम आने पर आगे की जानकारी प्रदान की जाएगी।