📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Heba Aisha
राजनीति
बिहार में नामकरण विवाद: लालू, नीतीश और दिवंगत रामविलास के नाम पर राजनीति गरम
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 11 सित. 2026, 03:17 PM
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बिहार में सार्वजनिक संपत्तियों को लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और दिवंगत रामविलास पासवान के नाम पर रखने की योजना पर नया राजनीतिक झगड़ा छिड़ा है, जो 25 साल पहले के नामकरण दौर को दोहराता है।
बिहार सरकार ने हाल ही में लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और दिवंगत रामविलास पासवान के नाम पर सड़कों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों को पुनःनामित करने की योजना पेश की है, जिससे राजनीतिक पार्टियों में तीव्र बहस छिड़ गई है। सत्ता गठबंधन का कहना है कि इन नेताओं को सम्मानित करना राज्य की राजनीतिक विरासत को दर्शाता है, जबकि विपक्ष का तर्क है कि यह कदम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए पक्षपाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग 25 साल पहले भी बिहार में इसी तरह का नामकरण दौर रहा था, जब कई प्रमुख स्थलों को राजनेताओं के नाम पर रखा गया था, जिससे प्रशंसा और आलोचना दोनों हुई। इस बार विवाद इस बात पर केंद्रित है कि दोहराव वाले सम्मान से अन्य क्षेत्रीय प्रतीकों को किनारे पर धकेला जा सकता है।
विरोधी दलों ने राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किए हैं, और सभी नामकरण निर्णयों में पारदर्शी और परामर्शी प्रक्रिया की मांग की है। सरकार का कहना है कि यह कदम जनमत के अनुरूप है और सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
नामकरण विवाद के बढ़ते तनाव के साथ, विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि यह आगामी चुनावी गणनाओं को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में इन तीन नेताओं के प्रति गहरी निष्ठा बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग 25 साल पहले भी बिहार में इसी तरह का नामकरण दौर रहा था, जब कई प्रमुख स्थलों को राजनेताओं के नाम पर रखा गया था, जिससे प्रशंसा और आलोचना दोनों हुई। इस बार विवाद इस बात पर केंद्रित है कि दोहराव वाले सम्मान से अन्य क्षेत्रीय प्रतीकों को किनारे पर धकेला जा सकता है।
विरोधी दलों ने राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किए हैं, और सभी नामकरण निर्णयों में पारदर्शी और परामर्शी प्रक्रिया की मांग की है। सरकार का कहना है कि यह कदम जनमत के अनुरूप है और सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
नामकरण विवाद के बढ़ते तनाव के साथ, विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि यह आगामी चुनावी गणनाओं को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में इन तीन नेताओं के प्रति गहरी निष्ठा बनी हुई है।