📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vanshu7002
स्वास्थ्य
बिहार में 90 दिनों में 6 करोड़ लोगों की घर‑घर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, ‘डॉक्टर आपके द्वार’ अभियान शुरू
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 02 सित. 2026, 03:35 PM
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बिहार सरकार ने 30 वर्ष से ऊपर के 6 करोड़ लोगों को लक्षित करते हुए 90 दिनों का घर‑घर स्वास्थ्य जांच‑उपचार अभियान शुरू किया, जिसमें डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड बनेंगे।
पटना, 2 सितंबर 2026 – बिहार सरकार ने "जांच एवं उपचार – चिकित्सा आपके द्वार" नामक 90‑दिन का अभियान शुरू किया, जिसमें 30 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को घर‑घर मुफ्त स्वास्थ्य जांच और उपचार प्रदान किया जाएगा। इस योजना का लक्ष्य पूरे राज्य के लगभग छह करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग कर डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड बनाना है।
प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रत्येक घर जाकर बुनियादी जांच करेंगे और परिणाम को एकीकृत डिजिटल डेटाबेस में दर्ज करेंगे। यह इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड फॉलो‑अप देखभाल को आसान बनाएगा और स्वास्थ्य संसाधनों के बेहतर वितरण में मदद करेगा।
जागरूकता बढ़ाने के लिए 38 जिलों में विशेष जागरूकता रथ भेजे गए हैं। रथों पर सूचना सामग्री, डिस्प्ले स्क्रीन और स्टाफ मौजूद हैं, जो कार्यक्रम के लाभ और लाभार्थियों को सेवाओं का उपयोग कैसे करना है, समझाते हैं।
सरकार ने दवाइयों, डायग्नोस्टिक टेस्ट और गंभीर मामलों के लिए उच्च‑स्तरीय सुविधाओं में रेफ़रल के लिए बजट आवंटित किया है। अधिकारी बताते हैं कि यह अभियान 90 दिनों तक चलेगा, जिसके बाद डेटा का विश्लेषण कर आगे की स्वास्थ्य नीतियों को दिशा दी जाएगी।
यह पहल बिहार की रोकथाम‑आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और वयस्क जनसंख्या में गैर‑संचारी रोगों के बोझ को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रत्येक घर जाकर बुनियादी जांच करेंगे और परिणाम को एकीकृत डिजिटल डेटाबेस में दर्ज करेंगे। यह इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड फॉलो‑अप देखभाल को आसान बनाएगा और स्वास्थ्य संसाधनों के बेहतर वितरण में मदद करेगा।
जागरूकता बढ़ाने के लिए 38 जिलों में विशेष जागरूकता रथ भेजे गए हैं। रथों पर सूचना सामग्री, डिस्प्ले स्क्रीन और स्टाफ मौजूद हैं, जो कार्यक्रम के लाभ और लाभार्थियों को सेवाओं का उपयोग कैसे करना है, समझाते हैं।
सरकार ने दवाइयों, डायग्नोस्टिक टेस्ट और गंभीर मामलों के लिए उच्च‑स्तरीय सुविधाओं में रेफ़रल के लिए बजट आवंटित किया है। अधिकारी बताते हैं कि यह अभियान 90 दिनों तक चलेगा, जिसके बाद डेटा का विश्लेषण कर आगे की स्वास्थ्य नीतियों को दिशा दी जाएगी।
यह पहल बिहार की रोकथाम‑आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और वयस्क जनसंख्या में गैर‑संचारी रोगों के बोझ को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।