📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / PPJ24
बिज़नेस
पीएनसी बैन के बाद भी बिहार एक्सप्रेसवे का निर्माण, गुणवत्ता पर उठे सवाल
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 24 सित. 2026, 04:32 PM
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लगभग 30% कार्य पूर्ण होने के बावजूद, पीएनसी कंपनी पर बैन के बाद बिहार में एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं।
वाराणसी‑रांची‑कोलकाता को जोड़ने वाले ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरता है और अब तक लगभग 30% पूरा हो चुका है। बिहार के हिस्से में सड़क का बिछावन और पुलों का निर्माण चल रहा है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में तेजी आएगी।
मुख्य ठेकेदार पीएनसी इन्फ्रास्ट्रक्चर को उत्तर प्रदेश में अनुशासनहीनता के आरोपों के कारण कार्य रोकने का आदेश मिला है। जबकि यह प्रतिबंध यूपी में नए अनुबंधों पर लागू है, बिहार में वही कंपनी अभी भी कार्य कर रही है, जिससे राज्य के अधिकारियों ने सतर्कता बरती है।
स्थानीय लोगों और परिवहन विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई है कि निरीक्षण की कमी से पहले से बने हिस्सों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। वे बिहार सरकार से स्वतंत्र गुणवत्ता जांच करवाने की मांग कर रहे हैं।
राज्य के अधिकारी बताते हैं कि जांच के परिणामों के आधार पर यदि कोई कमी पाई जाती है तो शेष कार्य को फिर से टेंडर किया जा सकता है। गुणवत्ता संबंधी मुद्दों को सुलझाने के बाद ही एक्सप्रेसवे का पूर्ण संचालन 2020 के मध्य तक संभव है।
मुख्य ठेकेदार पीएनसी इन्फ्रास्ट्रक्चर को उत्तर प्रदेश में अनुशासनहीनता के आरोपों के कारण कार्य रोकने का आदेश मिला है। जबकि यह प्रतिबंध यूपी में नए अनुबंधों पर लागू है, बिहार में वही कंपनी अभी भी कार्य कर रही है, जिससे राज्य के अधिकारियों ने सतर्कता बरती है।
स्थानीय लोगों और परिवहन विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई है कि निरीक्षण की कमी से पहले से बने हिस्सों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। वे बिहार सरकार से स्वतंत्र गुणवत्ता जांच करवाने की मांग कर रहे हैं।
राज्य के अधिकारी बताते हैं कि जांच के परिणामों के आधार पर यदि कोई कमी पाई जाती है तो शेष कार्य को फिर से टेंडर किया जा सकता है। गुणवत्ता संबंधी मुद्दों को सुलझाने के बाद ही एक्सप्रेसवे का पूर्ण संचालन 2020 के मध्य तक संभव है।