📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Channveer.p
कृषि
बिदर का क़रेज़ सिस्टम भारत में जल संरक्षण का मॉडल बन सकता है
✍️ Udayavani
🗓 10 अक्टू. 2026, 01:38 PM
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बिदर में मौजूद पारंपरिक क़रेज़ जल नेटवर्क को देश भर में जल संकट के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कर्नाटक के बिदर शहर में स्थित प्राचीन क़रेज़ जल प्रणाली ने देश भर में जल संरक्षण के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में ध्यान आकर्षित किया है। यह भूमिगत नहर भूजल को सतह तक लाती है और वाष्पीकरण के बिना पानी पहुँचाती है, जिससे ऊर्जा की खपत कम रहती है।
क़रेज़ का ढांचा गुरुत्वाकर्षण और धीरे-धीरे ढलान वाले टनलों पर आधारित है, जिससे न्यूनतम बुनियादी ढांचा खर्च में पानी का संग्रह और वितरण संभव होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली को शुष्क और अर्ध‑शुष्क क्षेत्रों में दोहराने से महंगे बोरवेल और जलाशयों पर निर्भरता घटेगी।
हालांकि यह तकनीक नई नहीं है, बिदर के क़रेज़ में नई रुचि भारत की जल प्रबंधन नीति में स्वदेशी और जलवायु‑सहनीय उपायों की ओर बदलाव को दर्शाती है। अब विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अनुकूलित करने के तरीकों की जांच की जा रही है, ताकि इसके पर्यावरणीय लाभ बरकरार रह सकें।
क़रेज़ का ढांचा गुरुत्वाकर्षण और धीरे-धीरे ढलान वाले टनलों पर आधारित है, जिससे न्यूनतम बुनियादी ढांचा खर्च में पानी का संग्रह और वितरण संभव होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली को शुष्क और अर्ध‑शुष्क क्षेत्रों में दोहराने से महंगे बोरवेल और जलाशयों पर निर्भरता घटेगी।
हालांकि यह तकनीक नई नहीं है, बिदर के क़रेज़ में नई रुचि भारत की जल प्रबंधन नीति में स्वदेशी और जलवायु‑सहनीय उपायों की ओर बदलाव को दर्शाती है। अब विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अनुकूलित करने के तरीकों की जांच की जा रही है, ताकि इसके पर्यावरणीय लाभ बरकरार रह सकें।