📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vishnu Shavi
शिक्षा
भोपाल के सरकारी स्कूल में कबाड़ से बने पढ़ाई के साधन, डॉ. अर्चना शुक्ला की नवाचारी पहल
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 14 सित. 2026, 01:01 PM
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डॉ. अर्चना शुक्ला, भोपाल के सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने टूटी टाइलों और पुराने टायरों को पढ़ाई के उपकरण बनाकर संसाधन की कमी को अवसर में बदला है।
भोपाल के एक सरकारी स्कूल में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ. अर्चना शुक्ला ने शैक्षणिक सामग्री की कमी को दूर करने के लिए कबाड़ को पढ़ाई के उपकरण में बदल दिया है। टूटी फॉल्स सीलिंग की टाइलों को विज्ञान के सरल मॉडल में ढाल कर छात्रों को व्यावहारिक प्रयोग करने का अवसर दिया गया।
पुराने टायर को काटकर बेंच और गणित के मॉडल बनाकर आकार, माप और ज्यामिति जैसे विषयों को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया। ये उपकरण अब कक्षा में नियमित रूप से उपयोग हो रहे हैं, जिससे छात्रों की रचनात्मक सोच को प्रोत्साहन मिला है।
स्कूल प्रशासन ने इस पहल की सराहना की, यह कहा कि यह न केवल सामग्री की कमी को पूरा करता है बल्कि छात्रों में नवाचार की भावना भी जगाता है। डॉ. शुक्ला का लक्ष्य है कि यह तरीका राज्य के अन्य कम संसाधन वाले स्कूलों में भी अपनाया जाए।
यह पहल मध्य प्रदेश में शिक्षा सुधार के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाती है, जहाँ कम बजट में स्थानीय संसाधनों और शिक्षक की पहल से शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है।
पुराने टायर को काटकर बेंच और गणित के मॉडल बनाकर आकार, माप और ज्यामिति जैसे विषयों को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया। ये उपकरण अब कक्षा में नियमित रूप से उपयोग हो रहे हैं, जिससे छात्रों की रचनात्मक सोच को प्रोत्साहन मिला है।
स्कूल प्रशासन ने इस पहल की सराहना की, यह कहा कि यह न केवल सामग्री की कमी को पूरा करता है बल्कि छात्रों में नवाचार की भावना भी जगाता है। डॉ. शुक्ला का लक्ष्य है कि यह तरीका राज्य के अन्य कम संसाधन वाले स्कूलों में भी अपनाया जाए।
यह पहल मध्य प्रदेश में शिक्षा सुधार के व्यापक प्रयासों के साथ मेल खाती है, जहाँ कम बजट में स्थानीय संसाधनों और शिक्षक की पहल से शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है।