📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shivam Agrawal
धर्म
बांधवगढ़ में जन्माष्टमी पर अनोखी पूजा: राम को कान्हा, सीता को राधारानी
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 03 सित. 2026, 05:32 PM
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बांधवगढ़, मध्य प्रदेश में जन्माष्टमी पर एक अनोखी परंपरा है, जहाँ भक्त राम को कान्हा और सीता को राधारानी के रूप में पूजा करते हैं।
बांधवगढ़ में हर वर्ष जन्माष्टमी के दौरान एक अनोखी पूजा की जाती है, जहाँ भक्त राम को कान्हा और माता सीता को राधारानी के रूप में पूजते हैं। यह परंपरा स्थानीय लोककथाओं पर आधारित है, जिसमें कहा जाता है कि राम-सीता का खेल का मैदान बाघों के जंगल के भीतर था।
उत्सव के दिन, मंदिर का ध्वज फहराया जाता है और भक्तों की एक झुंड छोटी-छोटी कान्हा और राधारानी की मूर्तियों के साथ गाँव के चारों ओर भक्ति गीत गाते हुए परिक्रमा करती है। यह प्रथा दैवीय जोड़ी के बीच के अनंत प्रेम और खेलभावना को दर्शाती है।
स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि यह पूजा भक्तों को यह याद दिलाती है कि भगवान न केवल दूरस्थ देवता हैं, बल्कि एक प्रेमपूर्ण साथी भी हैं जो खुशी और खेल का अनुभव करते हैं। इस कार्यक्रम में पड़ोसी जिलों के लोग भी भाग लेते हैं, जिससे बंधवगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक एकता स्पष्ट होती है।
मंदिर प्राधिकरण ने यह सुनिश्चित किया है कि उत्सव पर्यावरण के प्रति सम्मानजनक ढंग से आयोजित किया जाए, क्योंकि आसपास का जंगल संरक्षित क्षेत्र है।
उत्सव के दिन, मंदिर का ध्वज फहराया जाता है और भक्तों की एक झुंड छोटी-छोटी कान्हा और राधारानी की मूर्तियों के साथ गाँव के चारों ओर भक्ति गीत गाते हुए परिक्रमा करती है। यह प्रथा दैवीय जोड़ी के बीच के अनंत प्रेम और खेलभावना को दर्शाती है।
स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि यह पूजा भक्तों को यह याद दिलाती है कि भगवान न केवल दूरस्थ देवता हैं, बल्कि एक प्रेमपूर्ण साथी भी हैं जो खुशी और खेल का अनुभव करते हैं। इस कार्यक्रम में पड़ोसी जिलों के लोग भी भाग लेते हैं, जिससे बंधवगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक एकता स्पष्ट होती है।
मंदिर प्राधिकरण ने यह सुनिश्चित किया है कि उत्सव पर्यावरण के प्रति सम्मानजनक ढंग से आयोजित किया जाए, क्योंकि आसपास का जंगल संरक्षित क्षेत्र है।