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बंडा के गणेशगंज के किसान गोविंद पटेल ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती से आत्मनिर्भरता पाई
गणेशगंज के कृषक गोविंद पटेल ने रासायनिक उर्वरकों से हटकर प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती को आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम बनाया, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई।
बंडा के विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मझगुवा के ग्राम गणेशगंज निवासी कृषक श्री गोविंद पटेल ने 2026 के सेवा संकल्प अभियान के तहत प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाकर अपनी खेती को आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम बनाया।
पहले वे रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भर थे, जिससे लागत बढ़ती और मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती। कुछ वर्ष पहले प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, गोमूत्र आधारित कीटनाशक और देशी बीजों का उपयोग शुरू किया।
जैविक पद्धति अपनाने से भूमि की संरचना में सुधार हुआ, केंचुओं की संख्या बढ़ी और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रही। उन्होंने गेहूं, चना और सब्जियों की जैविक खेती की, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में अच्छा मूल्य मिला।
इस सफलता से उनका शुद्ध लाभ बढ़ा और वे अन्य किसानों को भी प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
गोविंद पटेल की कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, धैर्य और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर खेती करने से किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
पहले वे रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भर थे, जिससे लागत बढ़ती और मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती। कुछ वर्ष पहले प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, गोमूत्र आधारित कीटनाशक और देशी बीजों का उपयोग शुरू किया।
जैविक पद्धति अपनाने से भूमि की संरचना में सुधार हुआ, केंचुओं की संख्या बढ़ी और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रही। उन्होंने गेहूं, चना और सब्जियों की जैविक खेती की, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में अच्छा मूल्य मिला।
इस सफलता से उनका शुद्ध लाभ बढ़ा और वे अन्य किसानों को भी प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
गोविंद पटेल की कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, धैर्य और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर खेती करने से किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।