📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Omprasadsohani
शिक्षा
बर्कतुल्लाह विश्वविद्यालय में 275 करोड़ रुपये वेतन भुगतान पर हाजिरी रिकॉर्ड की कमी की जांच
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 04 नव. 2026, 05:16 PM
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आरटीआई पूछताछ में पता चला कि बर्कतुल्लाह विश्वविद्यालय ने 1988‑2023 में कर्मचारियों के वेतन‑भत्तों पर लगभग 275 करोड़ रुपये खर्च किए, पर हाजिरी और भुगतान रजिस्टर उपलब्ध नहीं करवा सका।
बर्कतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल में 1988 से 2023 तक के कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड के लिये आरटीआई आवेदन दायर किया गया। विश्वविद्यालय ने बताया कि इस अवधि में लगभग 275 करोड़ रुपये वेतन‑भत्तों के रूप में खर्च हुए, परन्तु हाजिरी पंजीकृत करने वाले दस्तावेज़ या विस्तृत भुगतान रजिस्टर उपलब्ध नहीं करवा सका।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि वेतन नियमित रूप से जारी होते रहे, परन्तु शुरुआती वर्षों के कागजात या तो खो गए हैं या डिजिटल रूप में नहीं हैं। इस अभाव ने यह सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी राशि किस आधार पर वितरित की गई।
विरोधी दलों और कर्मचारियों के संघों ने स्वतंत्र ऑडिट की माँग की है और राज्य सरकार से काउंटी कंट्रोलर और ऑडिटर जनरल को शामिल करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक धन के उचित उपयोग के लिये पारदर्शिता आवश्यक है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वह किसी भी जांच एजेंसी के साथ सहयोग करेगा और अभिलेख‑रखरखाव की प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है। मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा प्राधिकरण द्वारा औपचारिक जांच का आदेश मिलने की संभावना है।
यह मामला भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है, जहाँ बड़े वेतनभत्ते अक्सर उचित दस्तावेज़ीकरण से रहित होते हैं।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि वेतन नियमित रूप से जारी होते रहे, परन्तु शुरुआती वर्षों के कागजात या तो खो गए हैं या डिजिटल रूप में नहीं हैं। इस अभाव ने यह सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी राशि किस आधार पर वितरित की गई।
विरोधी दलों और कर्मचारियों के संघों ने स्वतंत्र ऑडिट की माँग की है और राज्य सरकार से काउंटी कंट्रोलर और ऑडिटर जनरल को शामिल करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक धन के उचित उपयोग के लिये पारदर्शिता आवश्यक है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वह किसी भी जांच एजेंसी के साथ सहयोग करेगा और अभिलेख‑रखरखाव की प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है। मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा प्राधिकरण द्वारा औपचारिक जांच का आदेश मिलने की संभावना है।
यह मामला भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है, जहाँ बड़े वेतनभत्ते अक्सर उचित दस्तावेज़ीकरण से रहित होते हैं।