📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Tiwaribharat
नौकरी
बारन की साहरिया महिलाओं ने लकड़ी संग्रह को आर्थिक स्वतंत्रता में बदला
✍️ The Economic Times
🗓 26 सित. 2026, 04:37 PM
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बारन जिले की साहरिया महिलाओं ने लकड़ी संग्रह से लेकर उसके व्यापार तक कदम बढ़ाते हुए आर्थिक सशक्तिकरण की ओर रुख किया है।
राजस्थान के बारन जिले में साहरिया जनजाति की महिलाएँ, जो पहले लकड़ी संग्रह में लगी रहती थीं, अब उसके व्यापार को संभाल रही हैं। पारम्परिक रूप से जंगल से लकड़ी इकट्ठा करके घरेलू उपयोग करती थीं, अब वे इस संसाधन को आय के स्रोत में बदल रही हैं।
स्थानीय स्तर पर स्थापित एक सहकारी ने प्रशिक्षण, स्टॉक प्रबंधन और बाजार संपर्क प्रदान किया है। महिलाओं ने मिलकर अपनी लकड़ी को एकत्र किया, जिससे बेहतर कीमतों पर सौदा हो रहा है और आय का अधिक हिस्सा उनके पास रह रहा है, जिससे वे केवल श्रमिक नहीं बल्कि व्यापार प्रबंधक बन गई हैं।
प्रारम्भिक संकेतों से पता चलता है कि इस पहल से परिवारों की आय में सुधार हो रहा है और आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ रहा है, जिससे अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी समान मॉडल अपनाने की संभावना बन रही है।
स्थानीय स्तर पर स्थापित एक सहकारी ने प्रशिक्षण, स्टॉक प्रबंधन और बाजार संपर्क प्रदान किया है। महिलाओं ने मिलकर अपनी लकड़ी को एकत्र किया, जिससे बेहतर कीमतों पर सौदा हो रहा है और आय का अधिक हिस्सा उनके पास रह रहा है, जिससे वे केवल श्रमिक नहीं बल्कि व्यापार प्रबंधक बन गई हैं।
प्रारम्भिक संकेतों से पता चलता है कि इस पहल से परिवारों की आय में सुधार हो रहा है और आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ रहा है, जिससे अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी समान मॉडल अपनाने की संभावना बन रही है।