📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / 15th BRICS SUMMIT
विदेश
बांग्लादेश ने दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को छोड़ दिया, भारत-बांग्लादेश तनाव बढ़े
✍️ dw.com
🗓 25 सित. 2026, 06:11 AM
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बांग्लादेश के दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अनुपस्थिति से भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं, जिससे कूटनीतिक ध्यान केंद्रित हुआ है।
नई दिल्ली में आयोजित नवीनतम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेता शामिल हुए। पड़ोसी दक्षिण एशियाई देश बांग्लादेश ने प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजने का निर्णय लिया, जिससे भारतीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित हुआ। इस अनुपस्थिति को असंतोष का संकेत माना जा रहा है, और विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यापार, सुरक्षा और जल-साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को जटिल बना सकता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस कदम की उम्मीद नहीं थी और स्पष्टता पाने के लिए कूटनीतिक चैनलों का उपयोग किया जा रहा है। जबकि अभी तक कोई औपचारिक विरोध नहीं किया गया है, मीडिया टिप्पणी में इस घटना को भारत‑बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के रूप में उजागर किया गया है।
दोनों राजधानियों के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, पर सीमा प्रबंधन और नदी जल वितरण पर हालिया असहमति ने तनाव बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश का शिखर सम्मेलन से दूर रहना आगामी द्विपक्षीय वार्ताओं से पहले एक सौदेबाजी रणनीति हो सकता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने वाले सदस्य आर्थिक सहयोग और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा जारी रखे हुए हैं, जबकि भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव क्षेत्रीय हितधारकों के लिए प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस कदम की उम्मीद नहीं थी और स्पष्टता पाने के लिए कूटनीतिक चैनलों का उपयोग किया जा रहा है। जबकि अभी तक कोई औपचारिक विरोध नहीं किया गया है, मीडिया टिप्पणी में इस घटना को भारत‑बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के रूप में उजागर किया गया है।
दोनों राजधानियों के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, पर सीमा प्रबंधन और नदी जल वितरण पर हालिया असहमति ने तनाव बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश का शिखर सम्मेलन से दूर रहना आगामी द्विपक्षीय वार्ताओं से पहले एक सौदेबाजी रणनीति हो सकता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने वाले सदस्य आर्थिक सहयोग और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा जारी रखे हुए हैं, जबकि भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव क्षेत्रीय हितधारकों के लिए प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।